कैथल: परिवार की खुशहाली का सपना लेकर अमेरिका गया था संजीव, नौ साल बाद आई मौत की खबर
कैथल, 02 नवंबर (हि.स.)। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और अपनों को बेहतर जिंदगी देने का सपना लेकर करीब नौ साल पहले अमेरिका गया गांव रसीना का संजीव अब कभी वापस नहीं लौटेगा। अमेरिका के कैलिफोर्निया में हार्ट अटैक से करीब 40 वर्षीय संजीव की मौत हो गई। 28 अक्टूबर को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
विदेश से आई इस दुखद खबर ने परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है। संजीव की मौत की सूचना मिलने के बाद गांव रसीना में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की हैं। परिजनों के अनुसार संजीव करीब नौ से दस साल पहले अमेरिका गया था। उस समय परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। परिवार को उम्मीद थी कि संजीव विदेश में मेहनत करके अच्छी कमाई करेगा और घर की परिस्थितियों को बदल देगा। वह कैलिफोर्निया में रहकर गाड़ी चलाने का काम करता था और वहां की नागरिकता भी प्राप्त कर चुका था। परिवार को उम्मीद थी कि कुछ वर्षों की मेहनत के बाद उसकी जिंदगी खुशहाल हो जाएगी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
45 लाख रुपये खर्च कर भेजा था विदेश
संजीव के चचेरे भाई राजेश ने बताया कि उसे अमेरिका भेजने के लिए परिवार ने करीब 45 लाख रुपये खर्च किए थे। इतनी बड़ी रकम जुटाने के लिए परिवार ने अपनी जमीन तक बेच दी थी और कुछ पैसे जानकारों से उधार भी लिए थे। परिवार ने यह सब इसलिए किया था ताकि संजीव विदेश जाकर कमाई कर सके और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो। अब उसकी अचानक मौत से परिवार के सामने भावनात्मक संकट के साथ-साथ आर्थिक परेशानियां भी खड़ी हो गई हैं।
पीछे छोड़ गया मां, पत्नी और दो बच्चे
संजीव शादीशुदा था और उसके परिवार में मां, पत्नी तथा दो बच्चे हैं। उसके पिता का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार की जिम्मेदारी अब पूरी तरह संकट में आ गई है। जिस बेटे से परिवार को आर्थिक सहारे और बेहतर भविष्य की उम्मीद थी, उसकी मौत की खबर ने सभी को तोड़कर रख दिया है। परिजनों और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने केंद्र व राज्य सरकार तथा सामाजिक संगठनों से संजीव का पार्थिव शरीर अमेरिका से भारत लाने में मदद करने की अपील की है, ताकि परिवार अंतिम बार अपने बेटे के दर्शन कर सके और उसका अंतिम संस्कार अपने गांव में कर सके।
हिन्दुस्थान समाचार / पंकज अत्रे

