कैथल के युवक की अमेरिका में ब्रेन हेमरेज से मौत

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कैथल के युवक की अमेरिका में ब्रेन हेमरेज से मौत


कैथल, 08 अक्टूबर (हि.स.)। बेहतर भविष्य और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना लेकर करीब तीन साल पहले अमेरिका गए गांव ट्योंठा के 26 वर्षीय युवक अजय चौधरी की ब्रेन हेमरेज के चलते मौत हो गई। शिकागो में अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उसके साथियों ने उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। युवक की मौत की खबर गांव पहुंचते ही परिवार में मातम छा गया।अजय के परिजनों के अनुसार, परिवार ने बेहतर कमाई की उम्मीद में करीब 42 लाख रुपये खर्च कर उसे अमेरिका भेजा था। परिवार ने अपनी जमा पूंजी लगाने के साथ-साथ रिश्तेदारों और परिचितों से भी पैसे उधार लिए थे। अमेरिका पहुंचने के बाद अजय शिकागो में रहकर एक राशन स्टोर पर काम कर रहा था और परिवार को उम्मीद थी कि वह मेहनत कर आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाएगा। हालांकि, अचानक हुई उसकी मौत ने परिवार के सभी सपनों को तोड़ दिया।अजय के चाचा विनोद कुमार ने बताया कि अजय की मौत ब्रेन हेमरेज के कारण हुई है। अब सबसे बड़ी चिंता उसके शव को अमेरिका से गांव वापस लाने की है। परिजनों के मुताबिक, शव को भारत लाने में भी बड़ी राशि खर्च होने की संभावना है, जबकि पहले ही अजय को विदेश भेजने के लिए परिवार कर्ज में डूब चुका है। ऐसे में परिवार के सामने आर्थिक संकट और गहरा गया है।उन्होंने बताया कि अजय के पिता धर्म सिंह, माता रेखा रानी और एक छोटी बहन है। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य नहीं है और करीब पौना एकड़ जमीन पर खेती करके परिवार का गुजारा चलता है। ऐसे में बेटे की मौत के बाद शव को वापस लाने का खर्च उठाना परिवार के लिए बेहद मुश्किल हो गया है।परिवार ने सरकार से अजय के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाने में सहायता उपलब्ध करवाने की अपील की है। परिजनों का कहना है कि वे अपने बेटे का अंतिम संस्कार अपने गांव में ही करना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक तंगी उनके सामने बड़ी बाधा बनी हुई है। वहीं, सामाजिक संस्थाओं और विदेशों में रह रहे भारतीयों से जुड़े संगठनों की ओर से भी सोशल मीडिया के माध्यम से अजय के शव को भारत लाने के लिए सहयोग की अपील की जा रही है। परिवार और ग्रामीणों को उम्मीद है कि सरकार और समाज के सहयोग से अजय का पार्थिव शरीर उसके पैतृक गांव लाया जा सकेगा और परिवार अंतिम बार उसका चेहरा देख सकेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज अत्रे

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