कैथल: बारिश ने बिगाड़ी किसानों की मेहनत, डेढ़ लाख मीट्रिक टन धान भीगा

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कैथल: बारिश ने बिगाड़ी किसानों की मेहनत, डेढ़ लाख मीट्रिक टन धान भीगा


कैथल: बारिश ने बिगाड़ी किसानों की मेहनत, डेढ़ लाख मीट्रिक टन धान भीगा


कैथल, 11 अक्टूबर (हि.स.)। जिले में रविवार को तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ा दी। खेतों में पककर तैयार धान की फसल कई जगह जमीन पर बिछ गई, वहीं मंडियों में खुले आसमान के नीचे रखी धान की बोरियां और ढेरियां भीग गईं। बारिश से जिले में करीब डेढ़ लाख मीट्रिक टन धान प्रभावित होने का अनुमान है। किसानों और आढ़तियों ने नुकसान के लिए मंडियों में धान का समय पर उठान न होने और बारिश से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने को जिम्मेदार ठहराया है।

कैथल की नई और अतिरिक्त अनाज मंडी में धान के करीब 22 लाख कट्टे पड़े थे। इनमें से बड़ी संख्या में कट्टे बारिश की चपेट में आ गए। मंडी प्रधान रघुबीर मलिक के अनुसार, अतिरिक्त अनाज मंडी में आठ लाख से अधिक कट्टे और धान की ढेरियां बारिश से प्रभावित हुई हैं। शेड भर जाने के कारण धान खुले में रखना पड़ा। बारिश के बाद कई जगह बोरियों के नीचे पानी जमा हो गया। मजदूरों को भीगी बोरियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और धान को बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी।

शेड की कमी और उठान में देरी ने बढ़ाई मुश्किल

नई अनाज मंडी में गोशाला के लिए इस्तेमाल होने वाली जगह पर मिट्टी में रखी धान की बोरियां भी पानी की चपेट में आ गईं। तिरपाल की व्यवस्था नहीं होने से आसपास रखी धान की ढेरियां भी भीग गईं। मॉडल टाउन सड़क, रामनगर और राजकीय कन्या स्कूल के सामने खाली जगहों पर रखी बोरियों और धान को भी नुकसान पहुंचा। पुरानी अनाज मंडी में शेड की कमी के कारण खुले में रखा धान बारिश से प्रभावित हुआ।

किसानों और आढ़तियों का कहना है कि धान का उठान समय पर नहीं होने से मंडियों में जगह की कमी हो गई थी। बार-बार मांग के बावजूद उठान की गति नहीं बढ़ी। ऐसे में मौसम खराब होने से खुले में रखे धान को बचाना मुश्किल हो गया। उनका आरोप है कि बारिश की आशंका के बावजूद संबंधित एजेंसियों और मार्केट कमेटी की ओर से पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए।

तेज हवाओं से खेतों में बिछी धान की फसल

बारिश के साथ चली तेज हवाओं ने खेतों में खड़ी फसल को भी नुकसान पहुंचाया। कई स्थानों पर पककर तैयार धान जमीन पर गिर गया। किसानों राजेंद्र और महेंद्र ने बताया कि जिन खेतों में हाल ही में पानी लगाया गया था, वहां फसल को अधिक नुकसान हुआ है। उनके अनुसार, पिछले सप्ताह हुई बारिश की तुलना में इस बार नुकसान ज्यादा हुआ है। तेज हवाओं से सब्जियों की फसल प्रभावित हुई है, जबकि हाल ही में बिजाई करने वाले किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ स्थानों पर गन्ने की फसल गिरने की भी सूचना है। जिले में पीआर किस्म के धान को अपेक्षाकृत अधिक नुकसान बताया जा रहा है। बारिश के बाद अब किसानों और आढ़तियों की चिंता धान को सुरक्षित रखने और जल्द उठान कराने को लेकर बढ़ गई है। उनका कहना है कि मंडियों में खुले में पड़े धान को बचाने के लिए तत्काल व्यवस्था करने के साथ उठान में तेजी लाना जरूरी है, ताकि आगे मौसम खराब होने पर नुकसान और न बढ़े।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज अत्रे

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