हिसार : गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय के शोध को अंतरराष्ट्रीय पहचान, एक्सआरडी पैटर्न आईसीडीडी के प्रतिष्ठित डेटाबेस में शामिल

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हिसार : गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय के शोध को अंतरराष्ट्रीय पहचान, एक्सआरडी पैटर्न आईसीडीडी के प्रतिष्ठित डेटाबेस में शामिल


प्रो. नीतू अहलावत के निर्देशन में शोधार्थी दीपा का शोध पीडीएफ-5 प्लस

2027 रिलीज का हिस्सा बना, कुलपति ने दी बधाई

हिसार, 22 अगस्त (हि.स.)। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय

सामग्री विज्ञान के क्षेत्र में एक और बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि दर्ज की है। विश्वविद्यालय

के भौतिकी विभाग की प्रो. नीतू अहलावत के निर्देशन में शोधार्थी दीपा द्वारा तैयार

शुद्ध सोडियम बिस्मथ टाइटनेट सिरेमिक का नया एक्स-रे डिफ्रैक्शन (एक्सआरडी) पैटर्न

दुनिया के प्रतिष्ठित इंटरनेशनल सेंटर फॉर डिफ्रैक्शन डेटा (आईसीडीडी) के पीडीएफ-5

प्लस 2027 डेटाबेस में शामिल किया गया है। इस उपलब्धि से गुजविप्रौवि को अंतरराष्ट्रीय

वैज्ञानिक मंच पर नई पहचान मिली है।

प्रो. नीतू अहलावत और उनकी टीम ने यह उपलब्धि कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई

के साथ साझा की। कुलपति ने प्रो. नीतू अहलावत, शोधार्थी दीपा और पूरी टीम को बधाई देते

हुए कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय पहचान को और मजबूत करेगी। उन्होंने

कहा कि इस तरह के उच्चस्तरीय शोध से विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षकों और शोधार्थियों

को भी विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी।

दुनिया भर के शोधकर्ताओं के लिए बनेगा उपयोगी रेफरेंस

आईसीडीडी का पीडीएफ-5 प्लस डेटाबेस विश्वसनीय क्रिस्टलोग्राफिक और एक्सआरडी

डेटा का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय स्रोत माना जाता है। किसी नए प्रयोगात्मक एक्सआरडी पैटर्न

का इस डेटाबेस में शामिल होना शोध की गुणवत्ता, सटीकता और वैज्ञानिक महत्व का महत्वपूर्ण

प्रमाण माना जाता है। डेटाबेस में शामिल यह पैटर्न दुनिया भर के वैज्ञानिकों, शोध संस्थानों,

प्रयोगशालाओं और उद्योगों को विभिन्न पदार्थों की पहचान और उनके विश्लेषण में मदद करेगा।

चुनिंदा भारतीय वैज्ञानिकों में शामिल हुईं प्रो. नीतू

प्रो. नीतू अहलावत उन चुनिंदा भारतीय रिसर्च वैज्ञानिकों के समूह में शामिल

हो गई हैं, जिनके प्रयोगात्मक एक्सआरडी पैटर्न को पिछले वर्षों में आईसीडीडी के प्रतिष्ठित

डेटाबेस में शामिल करने के लिए स्वीकार किया गया है। गुजविप्रौवि के लिए यह उपलब्धि

इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे विश्वविद्यालय की सामग्री विज्ञान में बढ़ती शोध

क्षमता और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय में बढ़ती स्वीकार्यता सामने आती है।

कुलसचिव डॉ. विजय कुमार ने भी प्रो. नीतू अहलावत और उनकी टीम के प्रयासों की

सराहना की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि किसी एक शोधकर्ता की सफलता तक सीमित नहीं है,

बल्कि पूरे विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय और एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस

अवसर पर प्रो. नीतू अहलावत के साथ शोधार्थी दीपा, कनिका सांगवान, पूजा, दीपक सैनी,

आरती और अचला रानी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

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