बैंक घोटाला: मैनेजर ने चालक, पत्नी, निजी सचिव व रिश्तेदारों के नाम पर बनाई तीन शेल कंपनियां

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चंडीगढ़, 12 मई (हि.स.)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हरियाणा में हुए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले की अब तक की जांच में भारी फर्जीवाड़ा उजागर किया है। पंचकूला की विशेष पीएमएलए अदालत को ईडी ने जानकारी दी कि बैंक घोटाले का मास्टरमाइंड बैंक का पूर्व शाखा प्रबंधक रिभव ऋषि था, जिसने अपने ड्राइवर, निजी सहायक और रिश्तेदारों के नाम पर शेल कंपनियां बनाई और उनके जरिये 570.82 करोड़ रुपये की हेराफेरी की।

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार रिभव ऋषि ने सरकारी खातों से धन निकालने के लिए तीन फर्में बनाई थीं। इनमें एक फर्म उसके ड्राइवर हेमराज के नाम पर, दूसरी हेमराज की पत्नी सपना और रिभव ऋषि के निजी सहायक भूपिंदर सिंह के नाम पर बनाई गई, जबकि तीसरी फर्म में रिभव ऋषि की मां कमलेश कुमारी और चार्टर्ड अकाउंटेंट अंकुर शर्मा को निदेशक बनाया गया था।

हरियाणा सरकार के विभागों के अलावा नगर निगम चंडीगढ़, रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक प्रमोशन सोसायटी (क्रिस्ट) चंडीगढ़ तथा पंचकूला के दो निजी स्कूलों के साथ भी धोखाधड़ी की गई।

अदालत ने रिभव ऋषि और उसके रिलेशनशिप मैनेजर अभय कुमार को 10 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया। हालांकि उसके वकीलों को प्रतिदिन एक घंटे मुलाकात की अनुमति दी गई है। ईडी का आरोप है कि अप्रैल 2023 से अगस्त 2025 तक चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित आइडीएफसी फर्स्ट बैंक शाखा में शाखा प्रबंधक रहे रिभव ऋषि द्वारा शेल कंपनियां बनाकर वित्तीय हेराफेरी करने की प्रक्रिया पूर्व नियोजित थी।

ईडी के अनुसार, एमएस कैपको फिनटेक सर्विसेज नामक फर्म को सीधे सरकारी विभागों तथा पंचकूला स्थित डीसी माडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल और डीसी मांटेसरी स्कूल से 471.69 करोड़ रुपये मिले। इस फर्म से जुड़े मोबाइल नंबर रिभव ऋषि के थे। कैपको फिनटेक का कोई वास्तविक कार्यालय नहीं था और अधिकतर राशि सावन ज्वैलर्स, मलिक ज्वैलर्स तथा केएलजी ज्वैलर्स को ट्रांसफर की गई, जिसके बाद नकद राशि एकत्र कर आपस में बांटी गई।

कैपको फिनटेक की एक साझेदार सपना (ड्राइवर हेमराज की पत्नी) ने ईडी को बताया कि रिभव ऋषि ने एलआइसी पालिसी खुलवाने के बहाने उसके दस्तावेज और फोटो लिए थे तथा उसे यह जानकारी नहीं थी कि उसे फर्म में पार्टनर बनाया गया है। एक अन्य शेल कंपनी एमएस आरएस ट्रेडर्स ड्राइवर हेमराज के नाम पर बनाई गई थी, जिसे 43.80 करोड़ रुपये मिले। इनमें हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद से 23.07 करोड़ रुपये, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से 16.23 करोड़ रुपये और क्रिस्ट से 4.5 करोड़ रुपये शामिल हैं। तीसरी कंपनी एमएस एसआरआर प्लानिंग गुरुस को 55.33 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। जुलाई 2024 में गठित इस कंपनी में रिभव ऋषि की मां और सीए अंकुर शर्मा निदेशक थे तथा इसका उपयोग नकदी जमा और वितरण के लिए किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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