जेलों में आत्महत्या पर मानवाधिकार आयोग ने जताई नाराजगी

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-एनसीआरबी की रिपोर्ट पर गृह सचिव व जेल महानिदेशक से मांगी रिपोर्ट

चंडीगढ़, 15 मई (हि.स.)। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने राज्य की जेलों में बढ़ती आत्महत्याओं, हिंसक घटनाओं, मानसिक स्वास्थ्य और भीड़भाड़ की गंभीर स्थिति पर स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार तथा जेल प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है।आयोग ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की प्रिजन स्टैटिस्टिक्स इंडिया-2024 रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए कहा कि जेलों में बंद व्यक्ति भी संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत गरिमामय जीवन, स्वास्थ्य सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं के अधिकार से वंचित नहीं किए जा सकते।

आयोग के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में हरियाणा की जेलों में 15 अप्राकृतिक कैदी मौतें दर्ज की गईं और सभी मामलों में मृत्यु का कारण आत्महत्या बताया गया। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा, सदस्य कुलदीप जैन और दीप भाटिया ने कहा कि हरियाणा देश का एकमात्र राज्य है जहां जेल परिसर के भीतर आग्नेयास्त्रों से संबंधित हिंसक झड़पें दर्ज की गईं। रिपोर्ट में जेलों के भीतर मानसिक तनाव, अवसाद, नशा मुक्ति से जुड़ी समस्याएं, हिंसक संघर्ष, भीड़भाड़ और पर्याप्त मनोवैज्ञानिक सहायता की कमी जैसी गंभीर स्थितियां भी उजागर हुई हैं। एनसीआरबी आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि जेलों में मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक उपचार के क्षेत्र में अभी भी अधिक सुदृढ़, संरचित और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है। आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने अगली सुनवाई 13 अगस्त को निर्धारित की गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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