हरियाणा के स्कूलों में बुनियादी ढांचे की जांच करेगी सीएम फ्लाइंग
चंडीगढ़, 02 मई (हि.स.)। प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्रवाई करने वाली सीएम फ्लाइंग अब स्कूलों तथा शिक्षा विभाग पर भी नजर रखेगी। स्कूलों में योजनाओं के क्रियान्वयन और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर की हकीकत जानने के लिए सीएम फ्लाइंग स्कवॉड स्कूलों का औचक निरीक्षण करेगी। सीएम फ्लाइंग स्क्वॉड खामियों की वीडियोग्राफी और फोटो के साथ पूरा डाटा तैयार करेगी। इस डाटा को मुख्यमंत्री नायब सैनी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं, ड्रॉप आउट और शून्य दाखिले सहित कई अन्य मुद्दों पर स्कूल शिक्षा विभाग के निदेशक ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सभी जिला शिक्षा अधिकारियों के साथ बैठक की। शिक्षा निदेशक ने स्पष्ट किया कि स्कूलों में संसाधनों, सुविधाओं से लेकर दाखिले लेकर हर स्तर पर जवाबदेही तय होगी। यही नहीं, लापरवाही करने वालों पर सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।
शिक्षा निदेशक ने वीडियो क्रांफ्रेसिंग के जरिये जिला शिक्षा अधिकारियों को हिदायत दी कि मई माह में सीएम फ्लाइंग स्क्वॉड स्कूलों का औचक निरीक्षण करेगी। सीएम फ्लाइंग टीम में राज्य स्तर के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। यदि बुनियादी सुविधाओं में कमी मिली तो संबंधित स्कूल मुखिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लिहाजा, जमीनी स्तर पर किसी भी तरह की कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में स्पष्ट किया कि प्रत्येक विद्यालय में टॉयलेट, पेयजल, मिड-डे-मील, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और साइंस लैब की व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त होनी चाहिए। इन सुविधाओं में किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर संबंधित स्कूल मुखिया और शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय है। खास तौर पर साइंस लैब में नियमित प्रैक्टिकल कराने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा निदेशक ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि ‘स्वच्छ प्रांगण’ योजना के तहत मिलने वाली 8000 रुपये की राशि अब उन स्कूलों को भी दी जाएगी, जहां एजुसेट चौकीदार कार्यरत है। हालांकि, जिन स्कूलों में पार्ट-टाइम स्वीपर पहले से है, उन्हें यह राशि नहीं मिलेगी।
सभी बीईओ को निर्देश दिए गए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों द्वारा अपनाए गए स्कूलों का निरीक्षण 15 मई तक हर हाल में पूरा हो। निरीक्षण के दौरान पांचों मुख्य सुविधाओं (विद्यालय में टॉयलेट, पेयजल, मिड-डे-मील, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और साइंस लैब) का गहन विश्लेषण किया जाएगा। जिन स्कूलों में मरम्मत के लिए फंड नहीं है, वे 3 दिनों के भीतर अपनी मांग बीईओ को भेजें। 5 मई तक मांग नहीं आने पर यह मान लिया जाएगा कि स्कूल में सभी संसाधन उपलब्ध हैं और कमी मिलने पर सीधे जिम्मेदारी तय होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

