हरियाणा सरकार दिव्यांगों के लिए करेगी विशेष शिक्षकों की भर्ती
-प्रदेश सरकार ने मंजूर किए विशेष शिक्षकों के 1093 पद
चंडीगढ़, 20 जुलाई (हि.स.)। हरियाणा में दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने के लिए जल्द ही विशेष शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। प्रदेश सरकार ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए शिक्षकों के कुल 1093 पद स्वीकृत किए हैं। इनमें 713 पद पांचवीं और 380 छठी से आठवीं तक के लिए हैं। इन पदों को भरने के लिए जल्द भर्ती विज्ञापन निकाला जाएगा। छह महीने के अंदर भर्ती पूरी करने का लक्ष्य है।
प्रदेश के सरकारी शिक्षण संस्थानों में पहली से आठवीं कक्षा में कुल 12 हजार 827 दिव्यांग पढ़ाई कर रहे हैं। हाई कोर्ट के आदेश पर प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि दो माह के भीतर विज्ञापन जारी कर विशेष शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने यथाशीघ्र विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए विशेष शिक्षकों की नियुक्तियां करने का निर्देश दिया है।
बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 और दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम-2016 के तहत दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष शिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य है। वर्तमान में हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के माध्यम से कुल 360 विशेष शिक्षक दिव्यांग बच्चों को पढ़ा रहे हैं। इनमें से पहली से आठवीं कक्षा तक के 137, माध्यमिक शिक्षा निदेशक के माध्यम से 210 और नेशनल एसोसिएशन फार द ब्लाइंड (एनएबी) के माध्यम से 13 शिक्षक अनुबंध पर कार्यरत हैं। नौवीं से बारहवीं तक के कुछ विशेष शिक्षकों को छोड़ दिया जाए तो सभी विशेष शिक्षक 10 वर्षों से अधिक समय से कार्यरत हैं। समावेशी शिक्षा समग्र शिक्षा के अंतर्गत केंद्र और राज्य सरकार द्वारा 60:40 के अनुपात में धनराशि उपलब्ध कराई जाती है।
विशेष शिक्षकों की सीधी भर्ती के लिए तैयार नीति में वर्ष 2022-23 की नीति को आधार बनाया गया है। पहली से पांचवीं तक कुल 7127 दिव्यांग छात्र अध्ययनरत हैं। प्रत्येक दस बच्चों पर एक शिक्षक के अनुपात के अनुसार इस वर्ग में 713 विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। इसी तरह छठी से आठवीं तक प्रत्येक 15 छात्रों पर एक शिक्षक के अनुपात के अनुसार 380 विशेष शिक्षकों की भर्ती होगी।
वहीं, आटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, डाउन सिंड्रोम और लर्निंग डिसएबिलिटी से ग्रस्त छात्रों को पढ़ाने के लिए अब सभी सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जाएगी। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए बीएड और डीएलएड पाठ्यक्रमों में भी विशेष माड्यूल शामिल करने पर काम शुरू हो गया है। वर्तमान में 300 से अधिक प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

