तीन नई नीतियों से निवेश, रोजगार और उद्यमिता को मिलेगी नई गति : नायब सिंह सैनी

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चंडीगढ़, 30 सितंबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य सरकार बजट घोषणाओं और संकल्प पत्र में किए गए वादों को धरातल पर उतारने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। इसी कड़ी में राज्य में निवेश, औद्योगिक विकास, रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए तीन नई नीतियों से संबंधित प्रोत्साहन योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में निवेश करने वाले उद्यमियों को पारदर्शी, समयबद्ध और परेशानी-मुक्त व्यवस्था उपलब्ध करवाना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि निवेश के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित हों।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में बुधवार को चंडीगढ़ में स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी की बैठक आयोजित हुई। बैठक में राज्य में निवेश, औद्योगिक विकास, एम एस एम ई क्षेत्र, कृषि-आधारित उद्योग तथा फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हरियाणा एग्री-बिजनेस एंड फूड प्रोसेसिंग पॉलिसी-2026, हरियाणा प्रोग्रेसिव एमएसएमई एंड एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी-2026 तथा मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2026 से संबंधित प्रोत्साहन योजनाओं एवं वित्तीय प्रावधानों पर चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी निवेशक को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। पात्रता प्रमाण-पत्र जारी करने से पहले संबंधित निवेश, रोजगार, दस्तावेजों और परियोजना की पात्रता का पूर्ण सत्यापन किया जाए तथा पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि पात्र निवेशकों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सेवाएं और प्रोत्साहन उपलब्ध करवाना संबंधित विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ.अमित कुमार अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2026 के तहत प्रस्तावित 18 प्रमुख वित्तीय प्रोत्साहन योजनाओं की जानकारी दी तथा इन योजनाओं के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री से अनुमोदन प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं के लिए पहले पांच वर्षों में अनुमानित वित्तीय प्रावधान 5,305.89 करोड़ रुपये है।

उन्होंने बताया कि इस नीति को हरियाणा को देश के प्रमुख निवेश केंद्र के रूप में मजबूत करने, उत्पादन लागत को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने, संतुलित एवं टिकाऊ औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इस नीति के तहत 10 लाख नए रोजगार सृजित करने, 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित करने तथा वार्षिक मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट को बढ़ाकर 3.24 लाख करोड़ रुपये करने का लक्ष्य रखा गया है।

डॉ.अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2026 के तहत प्रोत्साहन राशि के वितरण की प्रक्रिया को समयबद्ध और सरल बनाया गया है। इसके तहत प्रारंभिक जांच वैधानिक लेखा परीक्षक तथा स्वतंत्र चार्टर्ड इंजीनियर के प्रमाण-पत्र और अंडरटेकिंग के आधार पर कुल प्रोत्साहन राशि का पहला 50 प्रतिशत हिस्सा मात्र 7 कार्य दिवसों के भीतर वितरित किया जाएगा। इसमें वित्त विभाग और संबंधित विभाग की निर्धारित प्रक्रिया शामिल होगी। इसके बाद विभाग द्वारा गठित समिति अथवा तृतीय-पक्ष एजेंसी द्वारा विस्तृत जांच और साइट विजिट पूरी किए जाने के बाद शेष 50 प्रतिशत राशि 45 कार्य दिवसों के भीतर जारी की जाएगी।

डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को हरियाणा प्रोग्रेसिव एम.एस.एम.ई एंड एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी-2026 की प्रमुख विशेषताओं और इसके तहत प्रस्तावित प्रोत्साहनों की जानकारी दी तथा नीति के प्रावधानों पर मुख्यमंत्री से अनुमोदन प्राप्त किया।

उन्होंने बताया कि यह नीति राज्य के एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करने तथा छोटे एवं मध्यम उद्यमों को निवेश, टेक्नोलॉजी, वित्त, रोजगार और निर्यात के नए अवसर उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। नीति में 60 परिवर्तनकारी पहलों को वित्त, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, निर्यात, सस्टेनेबिलिटी और स्किल्स जैसे छह प्रमुख क्षेत्रों के अंतर्गत रखा गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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