पुरानी पेंशन पर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने की तैयारी में हरियाणा सरकार

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-एजी की राय के बाद वित्त विभाग का आदेश

चंडीगढ़, 05 सितंबर (हि.स.)। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से 95 कर्मचारियों को मिली पुरानी पेंशन और पेंशन लाभ की राहत पर हरियाणा सरकार ने अपील का रास्ता चुना है। एडवोकेट जनरल की राय के बाद वित्त विभाग ने संबंधित प्रशासनिक विभागों को हाईकोर्ट के 9 जुलाई के फैसले के खिलाफ लेटर्स पेटेंट अपील (एलपीए) दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।विभागों को 10 दिन में कार्रवाई पूरी करने को कहा गया है। हाईकोर्ट ने ओमप्रकाश बनाम हरियाणा सरकार मामले के साथ जुड़े 94 अन्य मामलों का निपटारा करते हुए कर्मचारियों को दो अलग-अलग श्रेणियों में राहत दी थी। सरकार अब इसी फैसले को चुनौती देने की तैयारी में है। पहली श्रेणी में वे कर्मचारी हैं, जिन्हें पहली जनवरी, 2006 से पहले पार्ट टाइम, अस्थायी या अनुबंध आधार पर नियुक्त किया गया और बाद में नियमित किया गया।

हाईकोर्ट ने नियमितीकरण से पहले की ऐसी सेवा को पेंशन के लिए क्वालिफाइंग सर्विस मानने का आदेश दिया था। अदालत ने इसी आधार पर पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ की गणना तथा पात्र बकाया राशि जारी करने के निर्देश दिए थे। सरकार की प्रस्तावित अपील इसी राहत को भी चुनौती देगी। वित्त विभाग ने संबंधित एक्सपेंडिचर कंट्रोलिंग ब्रांचों के जरिए कार्रवाई कराने के निर्देश दिए हैं। पत्र में मामले को ‘मोस्ट अर्जेंट’ बताते हुए 10 दिन की समयसीमा तय की गई है।

दूसरी श्रेणी में वे कर्मचारी हैं, जिनके पदों का विज्ञापन नई पेंशन व्यवस्था लागू होने से पहले जारी हो चुका था, लेकिन नियुक्ति बाद में हुई। हाईकोर्ट ने 8 मई, 2023 के सरकारी कार्यालय ज्ञापन के संदर्भ में ऐसे कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना चुनने का विकल्प देने का आदेश दिया था। अदालत ने संबंधित कर्मचारियों को छह सप्ताह में विकल्प देने और उसके बाद दावों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। 95 मामलों में शिक्षा विभाग से जुड़े मामले भी हैं। मुख्य याचिका ओम प्रकाश की सेवा सरकारी प्राथमिक विद्यालय में पार्ट टाइम सफाईकर्मी के रूप में की गई सेवा से संबंधित थी। जेबीटी शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ा मामला भी फैसले में शामिल है। इसके अलावा पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक से संबंधित मामला भी 95 याचिकाओं में है। वित्त विभाग के 2 सितंबर के पत्र में सभी मामलों का विभागवार ब्योरा नहीं दिया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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