हिसार : मधुमक्खी पालन किसानों की आय व फसल उत्पादन बढ़ाने में सहायक : प्रो. बीआर कम्बोज

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हिसार : मधुमक्खी पालन किसानों की आय व फसल उत्पादन बढ़ाने में सहायक : प्रो. बीआर कम्बोज


हकृवि में मधुमक्खी पालकों का सम्मेलन, वैज्ञानिक तकनीकों और बेहतर प्रबंधन

पर हुआ मंथन

हिसार, 30 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में खादी एवं ग्रामोद्योग

आयोग (केवीआईसी), हरियाणा तथा कीट विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में मधुमक्खी

पालकों का बुधवार काे सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में प्रदेशभर से आए मधुमक्खी पालकों, किसानों,

वैज्ञानिकों तथा संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

सम्मेलन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज मुख्य अतिथि रहे जबकि

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के निदेशक डॉ. कुलदीप वर्मा व सहायक निदेशक हितेंद्र सिंह

हुड्डा भी मौजूद रहे। कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने बुधवार काे कहा कि मधुमक्खी पालन किसानों की

आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि विविधीकरण का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। मधुमक्खियां केवल

शहद उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि फसलों के परागण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती

हैं। इनके प्रभावी परागण से फसलों की पैदावार और गुणवत्ता में सुधार होता है। उन्होंने

बताया कि भारत विश्व के प्रमुख शहद निर्यातक देशों में शामिल है और वर्ष 2024-25 के

दौरान देश में 1.52 लाख मीट्रिक टन शहद का उत्पादन हुआ। उन्होंने मधुमक्खी पालकों से

वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने, मधुमक्खी कॉलोनियों का उचित प्रबंधन करने तथा शहद एवं

अन्य मधुमक्खी उत्पादों के बेहतर मूल्य संवर्धन पर ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने

कहा कि विश्वविद्यालय किसानों और मधुमक्खी पालकों को आधुनिक तकनीकों एवं वैज्ञानिक

जानकारी उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के निदेशक डॉ. कुलदीप वर्मा ने मधुमक्खी पालन की

आधुनिक तकनीकों, कॉलोनी प्रबंधन, शहद उत्पादन तथा फसलों में परागण के महत्व की जानकारी

दी। उन्होंने मधुमक्खी पालकों को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक तकनीकों को

अपनाने की सलाह दी। कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. रमेश गोयल ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत

करते हुए कहा कि इस प्रकार के सम्मेलन किसानों, मधुमक्खी पालकों और वैज्ञानिकों के

बीच ज्ञान एवं अनुभव साझा करने का प्रभावी मंच प्रदान करते हैं। इससे मधुमक्खी पालन

को स्वरोजगार और आय के बेहतर साधन के रूप में विकसित करने में मदद मिलती है। कीट विज्ञान

विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीता यादव ने विभाग की गतिविधियों तथा मधुमक्खी पालन से

संबंधित प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन की जानकारी दी। उन्होंने मधुमक्खी कॉलोनी

के वैज्ञानिक प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण तथा गुणवत्तापूर्ण शहद उत्पादन के लिए

आवश्यक तकनीकों पर प्रकाश डाला।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

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