हिसार : बुढ़ापा पेंशन बनवाने के लिए बुजुर्गों को आना पड़ रहा प्रशासन के द्वार

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हिसार : बुढ़ापा पेंशन बनवाने के लिए बुजुर्गों को आना पड़ रहा प्रशासन के द्वार


हिसार, 30 मार्च (हि.स.)। सरकार ने कई विभागों

में ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू की है, जिसके तहत सभी काम कंप्यूटर पर ऑनलाइन ही किए जा

रहे हैं। बुढ़ापा पेंशन भी ऑनलाइन ही शुरू की जा रही है लेकिन इसके बावजूद भी बजुर्गों

को शिविर में आकर पेंशन से संबंधित समस्या का समाधान करवाने के लिए आना पड़ रहा है।

अन्य विभागों के कार्यों के लिए भी प्रशासन का ढीला रवैया आज भी देखने को मिल रहा है।

ग्रामीणों को समस्या का समाधान करवाने के लिए

सरकार द्वारा समाधान शिविर का सोमवार और गुरुवार को लगाया जा रहा है जिसमें कोई भी

ग्रामीण अपनी समस्या का समाधान करवा सकता है। ज्यादातर मामले पेंशन से संबंधित होते

हैं। साेमवार काे नारनौंद से कृष्णा, रामप्यारी सुबह ही अपनी समस्या को लेकर उपमंडल परिसर कार्यालय

में आयोजित समाधान शिविर में पहुंचकर इंतजार में बैठ गई। समय होते ही समाज कल्याण विभाग

से बलराज सैनी ओर क्रीड़ से शक्ति सिंह सहित अन्य विभागों के कर्मचारी पहुंच गए। कृष्णा

और रामप्यारी ने बताया कि उनकी बुढ़ापा पेंशन बंद हो चुकी है। पहले हर महीने अपने आप

बैंक के खाते में पहुंच जाती थी लेकिन अब पिछले कुछ महीनो से नहीं आ रही। बैंक में

जाकर पता किया तो वहां पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला उसके बाद इस समाधान शिविर में

शिकायत लेकर पहुंची है। यहां पर मौजूद कर्मचारियों ने चेक की तो पता चला कि फैमिली

आईडी और बैंक के खाते में जो नाम है उसमें भिन्नता है। इस वजह से पेंशन बंद कर दी गई

है। अब फैमिली आईडी में नाम को ठीक करवाने का बोला गया है इसके लिए भी अलग-अलग कार्यों

के चक्कर काटने पड़ेंगे। गांव नाड़ा से बलिंद्र ने बताया कि काफी समय पहले तहसील में

जमीन मैं ऑनलाइन के रिकॉर्ड को लेकर कुछ गलती हो गई थी उसका समाधान करवाने के लिए लगातार

पटवारी चक्कर कटवा रहा है। आज तक भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। समाधान शिविर में भी

इसकी शिकायत कर चुका हूं। राजथल से शीला, कापड़ों से मुकेश ने बताया कि वह नई बुढ़ापा

पेंशन बनवाने के लिए पहुंची है सभी कागजाद दिए गए हैं। खेड़ी चौपटा से सोमबीर के परिजनों

ने बताया कि दिव्यांग पेंशन के लिए लगातार चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जो भी कागजात मांगे

गए थे वो दे दिए थे लेकिन अब तक नहीं बनी है। हर बार कह दिया जाता कि जल्द ही बनकर

आ जाएगी।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

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