हरियाणा सरकार ने न्यू पेंशन स्कीम में कर्मचारियों को दिए विकल्प

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-कर्मचारी अपनी मर्जी से लेंगे मार्केट का जोखिम

-कर्मचारियों के पास एनपीएस व यूपीएस का पहले से है विकल्प

-मुख्य पेंशन खाते (टियर-1) में जोड़े गए दो नए निवेश मॉडल

चंडीगढ़, 17 जून (हि.स.)। हरियाणा सरकार ने कर्मचारियों को नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) और यूपीएस के बीच एकऔर बदलाव किया है। सरकार ने एनपीएस के टियर-1 यानी मुख्य पेंशन खाते में दो नए निवेश विकल्प जोड़ दिए हैं। इससे कर्मचारी अपनी उम्र और जोखिम लेने की क्षमता के हिसाब से तय कर सकेंगे कि उनकी पेंशन के लिए जमा हो रही राशि का कितना हिस्सा बाजार आधारित निवेश में लगाया जाए।

हरियाणा के कर्मचारी संगठनों की लंबे समय से मांग रही है कि उन्हें ओपीएस के दायरे में वापस लाया जाए, जिसमें रिटायरमेंट के बाद तय पेंशन की व्यवस्था रहती है। दूसरी तरफ एनपीएस निवेश आधारित व्यवस्था है। इसमें कर्मचारी और सरकार दोनों योगदान करते हैं। रिटायरमेंट लाभ निवेश के प्रदर्शन पर भी निर्भर करता है। केंद्र सरकार यूपीएस लेकर आई। इसके बाद राज्य सरकार ने कर्मचारियों को एनपीएस में बने रहने या यूपीएस चुनने का विकल्प उपलब्ध कराया। अब जो नया फैसला आया है, वह उन कर्मचारियों के लिए अहम माना जा रहा है जो एनपीएस में बने रहने का विकल्प चुनते हैं।

सरकार ने बदलाव एनपीएस के टियर-1 खाते में किया है। यही मुख्य पेंशन खाता होता है, जिसमें हर महीने कर्मचारी और सरकार का नियमित योगदान जमा होता है। रिटायरमेंट के समय पेंशन और फंड इसी खाते से जुड़ते हैं। नई व्यवस्था में सरकार ने दो अतिरिक्त ऑटो-चॉइस निवेश मॉडल जोड़े हैं। यानी अब निवेश का तरीका पहले से ज्यादा लचीला होगा।

पहला नया विकल्प लाइफ साइकिल 75-हाई है। इसमें कर्मचारी के योगदान का 75 प्रतिशत तक हिस्सा इक्विटी में लगाया जा सकेगा। यह व्यवस्था 35 साल की उम्र तक लागू रहेगी। इसके बाद इक्विटी निवेश धीरे-धीरे कम होता जाएगा और 55 साल की उम्र तक घटकर 15 प्रतिशत रह जाएगा। सरल शब्दों में समझें तो नौकरी की शुरुआत में सिस्टम ज्यादा वृद्धि की संभावना वाले निवेश को मौका देगा, लेकिन रिटायरमेंट करीब आने पर जोखिम अपने आप कम होता जाएगा।

दूसरा विकल्प लाइफ साइकिल एग्रेसिव है। इसमें 45 वर्ष की उम्र तक निवेश का 50 प्रतिशत हिस्सा इक्विटी में रखा जा सकेगा। इसके बाद यह अनुपात धीरे-धीरे कम होकर 55 वर्ष की उम्र तक 35 प्रतिशत रह जाएगा। यह विकल्प उन कर्मचारियों को ध्यान में रखकर माना जा रहा है जो पूरी तरह आक्रामक निवेश नहीं चाहते, लेकिन सामान्य निवेश मॉडल से बेहतर रिटर्न की संभावना बनाए रखना चाहते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नया मॉडल अपने आप लागू नहीं होगा। जो कर्मचारी डिफॉल्ट निवेश व्यवस्था से अलग विकल्प लेना चाहेंगे, उन्हें खुद निवेश मॉडल चुनना होगा और पंजीकृत पेंशन फंड का चयन भी करना होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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