एचएसपीसीबी का चीफ अकांउट ऑफिसर तीन दिन के सीबीआई रिमांड पर

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चंडीगढ़, 03 जुलाई (हि.स.)। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) से जुड़े बहुचर्चित बैंक घोटाले में गिरफ्तार तत्कालीन चीफ अकाउंट्स ऑफिसर प्रवीण कुमार को शुक्रवार को पंचकूला की अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को तीन दिन की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया। सीबीआई ने चार दिन की रिमांड की मांग की थी।

यह इस मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जुड़ी तीसरी गिरफ्तारी है। इससे पहले डाटा एंट्री ऑपरेटर और बोर्ड के तत्कालीन सदस्य सचिव रहे आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार डागर को भी इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।

सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया कि प्रवीण कुमार एचएसपीसीबी में वरिष्ठ लेखा अधिकारी (सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर) और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता थे। उनके कार्यकाल के दौरान सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खोले गए खाते के माध्यम से बोर्ड को 169 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जिसमें से करीब 110 करोड़ रुपये की कथित फर्जी निकासी उनके कार्यकाल में हुई।

सीबीआई के अनुसार, प्रवीण कुमार को 2 जुलाई, 2026 को चंडीगढ़ स्थित सीबीआई कार्यालय से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया और अगले दिन दोबारा मेडिकल जांच के बाद अदालत में पेश किया गया।

जांच एजेंसी का कहना है कि 27 फरवरी 2025 को खोले गए बैंक खाते के जरिए फर्जी लेन-देन किए गए, जिससे बोर्ड को कुल 169 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। यह नुकसान इस घोटाले से प्रभावित आठ सरकारी विभागों में सबसे अधिक बताया गया है। सीबीआई का दावा है कि आरोपी के तबादले से पहले ही उसके कार्यकाल के दौरान 110 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी हुई, जिसकी जिम्मेदारी उसी पर बनती है।

सीबीआई ने अदालत को बताया कि जिस बैंक खाते के जरिए कथित फर्जी लेन-देन किए गए, उसके अकाउंट ओपनिंग फॉर्म पर वरिष्ठ लेखा अधिकारी एवं अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के रूप में प्रवीण कुमार के हस्ताक्षर मौजूद हैं। जांच में विभाग के पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि खाता किस प्रक्रिया के तहत खोला गया। एजेंसी के अनुसार, खाते के लिए किसी सक्षम अधिकारी से स्वीकृति नहीं ली गई और न ही वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई।

जांच में यह भी सामने आया कि खाते से संबंधित ई-फाइल पहले प्रवीण कुमार को मार्क की गई थी, जिसे उन्होंने बाद में सह-आरोपी सौरव शर्मा को अग्रेषित कर दिया। सीबीआई का कहना है कि इससे स्पष्ट होता है कि आरोपी को खाते की पूरी जानकारी थी, लेकिन अब तक उसने इसके संबंध में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया है।

सीबीआई ने यह भी दावा किया कि लगभग 110 करोड़ रुपये की कथित फर्जी निकासी ऐसे चेकों के माध्यम से की गई, जिन पर वरिष्ठ लेखा अधिकारी के रूप में प्रवीण कुमार के हस्ताक्षर थे। जांच में यह भी पाया गया कि इस खाते की पहली चेकबुक विभाग में प्राप्त हुई थी, लेकिन उसकी विधिवत प्राप्ति दर्ज नहीं की गई और वह बरामद भी नहीं हुई। बाद में जारी दूसरी चेकबुक के चेकों के जरिए रकम विभिन्न शेल कंपनियों के खातों में स्थानांतरित कर दी गई।

मामले की जांच जारी है और सीबीआई रिमांड के दौरान आरोपी से बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया, फर्जी निकासी और अन्य आरोपियों की भूमिका को लेकर पूछताछ करेगी।-------------------

हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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