हरियाणा की पहचान कर्म, कर्तव्यनिष्ठा और सांस्कृतिक मूल्य: प्रो. असीम कुमार घोष

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हरियाणा की पहचान कर्म, कर्तव्यनिष्ठा और सांस्कृतिक मूल्य: प्रो. असीम कुमार घोष


विकसित हरियाणा ही विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है

चंडीगढ़, 01 नवंबर (हि.स.)। हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने हरियाणा के गठन के 60 वर्ष पूरे होने पर प्रदेशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छह दशकों की यह यात्रा केवल एक नए राज्य के निर्माण और विकास की कहानी नहीं है, बल्कि संघर्ष, श्रम, आत्मसम्मान, कर्तव्यनिष्ठा और सामूहिक संकल्प की ऐसी गाथा है, जिसने प्रदेश को राष्ट्रीय पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई है। हरियाणा की असली ताकत यहां की मिट्टी से जुड़े वे जीवन मूल्य हैं, जो किसान के परिश्रम, सैनिक के साहस और खिलाड़ी के अनुशासन में दिखाई देते हैं।

राज्यपाल रविवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में हरियाणा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित हीरक जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। समारोह में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी उपस्थित रहे।

उन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं तथा समारोह की गरिमा बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना की। प्रो. असीम कुमार घोष ने हरियाणा की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी पावन भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था।

उन्होंने कहा कि हरियाणा ने कृषि प्रधान राज्य के रूप में भारत की हरित क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज यह राज्य कृषि, उद्योग, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और खेल के क्षेत्र में अग्रणी है। गुरुग्राम की गगनचुंबी इमारतों से लेकर गांवों के अखाड़ों तक, हरियाणा ने यह साबित किया है कि परंपरा और आधुनिकता साथ-साथ चल सकती हैं। राज्यपाल ने कहा कि जब भारत वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तो हरियाणा को भी निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहना चाहिए। वर्ष 1966 की प्रति व्यक्ति आय की तुलना में वर्ष 2025-26 में हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय लगभग 3,95,618 रुपये होने का अनुमान है, जो राज्य की शानदार समावेशी प्रगति को दर्शाता है।

राज्यपाल ने युवाओं और शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर विशेष बल देते हुए कहा कि युवा हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे पूरी लगन के साथ अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रयास करें, नवाचार को अपनाएं और ईमानदारी से समाज की सेवा करें। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय जैसे शिक्षण संस्थानों की विशेष जिम्मेदारी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

Livevns.news Desk
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