हरियाणा:फिरौती मांगने की घटना में 40 फीसदी की कमी

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हरियाणा:फिरौती मांगने की घटना में 40 फीसदी की कमी


-डीजीपी ने ली अधिकारियों की बैठक

चंडीगढ़, 10 जनवरी (हि.स.)। हरियाणा पुलिस ने वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में घटनाओं में 40 प्रतिशत की कमी होने का दावा किया है। पुलिस ने पिछले वर्ष 9 टारगेटेड मर्डर की बड़ी साजिशों को भी समय रहते विफल किया। पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने शनिवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक में यह जानरकारी साझा की। बैठक की शुरुआत में डीजीपी सिंघल ने राज्य में सक्रिय गैंगस्टरों और उनके विदेशी नेटवर्क के खतरों को रेखांकित करते हुए स्पष्ट कहा कि प्रदेश में डर और दहशत फैलाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

सिंघल ने जोर देकर कहा कि ऐसे लोग जो जनता में भय का वातावरण पैदा करते हैं, चाहे वे कहीं भी छिपे हों, उन्हें आतंकवादियों की श्रेणी में रखा जाएगा और कानून के अंतर्गत उन पर सबसे कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि संगठित अपराध का नेटवर्क तभी टूट सकेगा जब अपराधियों की पूरी संरचना का विश्लेषण करके उनके वास्तविक स्रोतों पर प्रहार किया जाएगा।

बैठक के दौरान आईजी एसटीएफ सतीश बालन ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से संगठित अपराध के वर्तमान ढांचे और तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कई गैंगस्टर विदेशों में बैठकर सोशल मीडिया और इंटरनेट आधारित कॉलिंग सिस्टम के जरिये अपने पूरे नेटवर्क को संचालित करते हैं। वर्चुअल नंबरों और फर्जी ऑनलाइन प्रोफाइल के माध्यम से वे अपने गिरोह के सदस्यों को निर्देश देते हैं और नई भर्ती के प्रयास करते हैं।

बालन ने यह भी बताया कि एसटीएफ ऐसे अपराधियों पर लगातार निगरानी रख रही है और उन्हें विदेशों से डिपोर्ट करवाने के लिए विभिन्न देशों की एजेंसियों के साथ सक्रिय समन्वय कर रही है। डीजीपी सिंघल ने इस पर जोर दिया कि कोई भी देश अपने यहां अपराधियों को पनाह देना नहीं चाहता, इसलिए हरियाणा पुलिस को विदेशी एजेंसियों से और अधिक मजबूत तालमेल बनाना होगा।

बैठक में यह चिंता भी व्यक्त की गई कि सोशल मीडिया के तेजी से प्रसार के चलते कई युवा वर्ग अपराधियों के संपर्क में आ रहे हैं। गैंगस्टर युवाओं को लालच देकर अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं। इस बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने के लिए अधिकारियों ने सुझाव दिया कि तकनीकी निगरानी के साथ-साथ युवाओं के लिए जागरूकता और काउंसलिंग कार्यक्रमों को भी बढ़ाया जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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