निहंग सिंहों ने सदैव धर्म, राष्ट्र और मानवता की रक्षा की:नायब सिंह सैनी
सरकार गुरु साहिबानों की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने को प्रयासरत
चंडीगढ़, 03 जनवरी (हि.स.)। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि ‘निहंग’ शब्द का अर्थ निडर हृदय वाले योद्धा से है और स्वयं गुरु साहिबान ने निहंग सिंहों को शस्त्रधारी ‘अकाल सेना’ का स्वरूप प्रदान किया था। खालसा पंथ में निहंग सिंह संप्रदाय की स्थापना का उद्देश्य धर्म और देश की रक्षा करना था, विशेषकर उन आक्रमणकारियों से जो बाहर से आकर भारत की सभ्यता और संस्कृति को चुनौती देते थे।
मुख्यमंत्री शनिवार को चंडीगढ़ स्थित आवास संत कबीर कुटीर में आयोजित निहंग सिंह संप्रदाय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर निहंग सिंह साहिबान ने मुख्यमंत्री को सरोपा और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 18वीं शताब्दी में अफगान आक्रांता अहमदशाह अब्दाली के बार-बार किए गए आक्रमणों को रोकने में निहंग सिंहों की भूमिका ऐतिहासिक रही। महाराजा रणजीत सिंह की सरकार-ए-खालसा की मजबूती का श्रेय भी निहंग सिंह योद्धाओं को जाता है।
नायब सिंह सैनी ने कहा कि भगानी और चमकौर के रणक्षेत्रों में निहंग सिंह गुरु साहिबान की ढाल बनकर खड़े रहे। बाद में बाबा बंदा सिंह बहादुर जी, बाबा दीप सिंह जी जैसे महान निहंग योद्धाओं ने मुगलों को परास्त कर खालसा पंथ को सुदृढ़ किया। सिख समाज में निहंग सिंहों का स्थान अत्यंत गौरवपूर्ण है, वे खालसा पंथ की रीढ़ हैं और उनका जीवन गुरु साहिबान की शिक्षाओं को समर्पित रहा है।
कुरुक्षेत्र के ज्योतिसर में 25 नवंबर 2025 को राज्य-स्तरीय विशाल समागम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सहभागिता की और गुरु तेग बहादुर को समर्पित सिक्के, डाक टिकट तथा कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं ने गुरु जी को नमन किया।
उन्होंने कहा कि गुरु जी की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार हेतु हरियाणा के रोड़ी, पिंजौर, फरीदाबाद और सढ़ौरा से चार यात्राएं निकाली गईं, जो प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से होती हुई 24 नवंबर को कुरुक्षेत्र पहुंचीं। करनाल में ‘हिन्द की चादर’ मैराथन आयोजित की गई, जिसमें 80 हजार से ज्यादा लोगों ने भाग लिया। सोनीपत के गांव बढख़ालसा में दादा कुशाल सिंह दहिया के बलिदान स्थल पर श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुनानगर के कलेसर में श्री गुरु तेग बहादुर जी के नाम पर वन स्थापित करने तथा उनकी स्मृति में यादगारी गेट के निर्माण का निर्णय लिया गया है। किशनपुरा, यमुनानगर में श्री गुरु तेग बहादुर कृषि महाविद्यालय खोलने की घोषणा की गई है। वर्ष 1984 के दंगों में प्रभावित 121 सिख परिवारों के एक-एक सदस्य को नौकरी देने का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज अंबाला का नाम श्री गुरु तेग बहादुर जी के नाम पर रखा गया है, टोहाना-जींद-धमतान साहिब मार्ग को श्री गुरु तेग बहादुर मार्ग नाम दिया गया है तथा यमुनानगर के मेडिकल कॉलेज का नाम ‘हिन्द की चादर’ श्री गुरु तेग बहादुर जी के नाम पर रखा गया है। असंध कॉलेज का नाम बाबा फतेह सिंह जी के नाम पर तथा लखनौर साहिब में माता गुजर कौर के नाम से वीएलडीए कॉलेज स्थापित किया गया है।
इस अवसर पर निहंग सिंह संप्रदाय के जत्थेदार बाबा जसवंत सिंह, बाबा दविंद्र सिंह, गुरप्रीत सिंह, माता जसबीर कौर, बाबा बालक सिंह, बाबा बलबीर सिंह, बाबा सुखदेव सिंह, बाबा मेजर सिंह, बाबा कुलविंद्र सिंह, बाबा जोधा सिंह, बाबा सुखजीत सिंह कन्हैया, मुख्यमंत्री के ओएसडी बी बी भारती, मुख्यमंत्री के पॉलिटिकल सेक्रेटरी तरुण भंडारी व अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

