हरियाणा को ब्यास नदी से नहीं मिल रहा पानी, बीबीएमबी को लिखा पत्र

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चंडीगढ़, 06 अप्रैल (हि.स.)। नदी जल बंटवारे को लेकर हरियाणा ने फिर से प्रदेश में बड़े संकट की आशंका जताई है। अब हरियाणा ने भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड को पत्र लिखकर कहा है कि उसे मौजूदा समय में ब्यास नदी से उसका सही कोटा नहीं मिल सकता है।

राज्य ने ब्यास-सतलुज लिंक प्रोजेक्ट के ज़रिए ब्यास से सतलुज में पानी के कम डायवर्जन को इस कमी का एक मुख्य कारण बताया है। हरियाणा ने अपने पत्र में कहा है कि 4 मार्च से बीएसएल से पानी कम छोड़ा जा रहा है, जिससे पता चलता है कि इस दौरान सतलुज की ओर काफ़ी पानी नहीं छोड़ा गया है। राज्य ने तर्क दिया कि इससे भाखड़ा सिस्टम के ज़रिए हरियाणा को ब्यास से मिलने वाला पानी का हिस्सा असल में कम हो गया है, जिससे उसे अपने तय हिस्से से कम पानी मिलने का डर बढ़ गया है।

सूत्रों ने बताया कि बीएसएल से कम डिस्चार्ज देहर पावर हाउस में टेक्निकल दिक्कतों से जुड़ा है, जो डायवर्जन सिस्टम का एक ज़रूरी हिस्सा है। हरियाणा को पानी की कमी का डर है क्योंकि ब्यास-सतलज लिंक प्रोजेक्ट में देहर टर्बाइन की समस्या आ रही है। राज्य ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि ब्यास के पानी को सतलुज सिस्टम में बिना रुकावट के डायवर्जन करना अपना हिस्सा बनाए रखने के लिए बहुत ज़रूरी है।

हरियाणा ने नदी के पानी में अपने हिस्से को लेकर नई चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उसे चल रहे साइकिल में ब्यास नदी से अपना सही कोटा नहीं मिल सकता है। बीएसएल से कम डिस्चार्ज देहर पावर हाउस में टेक्निकल दिक्कतों से जुड़ा है, जो डायवर्जन सिस्टम का एक ज़रूरी हिस्सा है।

देहर प्रोजेक्ट में छह में से सिर्फ़ दो टर्बाइन अभी चालू हैं, जिससे ब्यास बेसिन से सतलुज में पानी का ट्रांसफऱ काफ़ी कम हो गया है। बीबीएमबी ने इस समस्या के लिए पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर को जिम्मेदार ठहराया है, और कहा है कि देहर पावर हाउस चार दशक से ज़्यादा पुराना है, को तुरंत ओवरहॉलिंग की ज़रूरत है।

अधिकारियों ने कहा कि बीबीएमबी ने टर्बाइनों के रेनोवेशन और मॉडर्नाइज़ेशन के लिए कंसल्टेंसी सर्विस देने के लिए पहले ही सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी को हायर कर लिया है। रिपेयर और ओवरहॉल प्रोसेस में समय लगने की उम्मीद है, जिसके दौरान डायवर्जन कैपेसिटी सीमित रह सकती है। हरियाणा ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि ब्यास के पानी को सतलुज सिस्टम में बिना रुकावट के भेजना अपना हिस्सा बनाए रखने के लिए बहुत ज़रूरी है। राज्य अभी मौजूदा कैनाल सिस्टम पर निर्भर है और सिर्फ़ लगभग 1.62 मिलियन एकड़-फ़ीट पानी ही ले जा सकता है, जिससे यह बीबीएमबी नेटवर्क के जरिए समय पर और काफ़ी पानी छोडऩे पर बहुत ज़्यादा निर्भर हो जाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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