गुरुग्राम: हरियाणा आए विस्थापितों ने प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को किया समृद्ध: राव इंद्रजीत सिंह
-गुरुग्राम में आयोजित हुआ विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का राज्य स्तरीय कार्यक्रम
गुरुग्राम, 14 अगस्त (हि.स.)। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि विभाजन की त्रासदी झेलकर हरियाणा आए विस्थापित परिवारों ने विपरीत परिस्थितियों में अपने जीवन को दोबारा खड़ा किया। प्रदेश के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विशेष रूप से पाकिस्तान से विस्थापित होकर हरियाणा आए पंजाबी समाज ने अपनी मेहनत, संघर्ष, उद्यमशीलता और संस्कारों से प्रदेश की विकास यात्रा को नई मजबूती दी।
राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि विभाजन के बाद बड़ी संख्या में परिवार हरियाणा में आए, जिनका प्रदेश के मूल निवासियों ने खुले मन से स्वागत किया और उन्हें समाज का अभिन्न हिस्सा बनाया। इन परिवारों ने भी हरियाणा को अपनी कर्मभूमि मानकर कृषि, व्यापार, उद्योग, शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया। आज हरियाणा की सामाजिक पहचान और समृद्धि में इन परिवारों की मेहनत और संघर्ष की महत्वपूर्ण भूमिका है। राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि विभाजन के बाद यहां आए पंजाबी समाज ने अपनी भाषा, खान-पान, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को हरियाणा की स्थानीय संस्कृति के साथ जोडक़र प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को और व्यापक एवं समृद्ध बनाया। उन्होंने कहा कि आज हरियाणा की पहचान अनेक संस्कृतियों के सुंदर समन्वय और आपसी भाईचारे के रूप में होती है। पंजाबी समाज की उद्यमशीलता और मेहनत ने प्रदेश को कृषि के साथ-साथ व्यापार, उद्योग और अन्य क्षेत्रों में भी आगे बढ़ाने में योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि हरियाणा ने विस्थापित परिवारों को केवल अपनाया ही नहीं, बल्कि उन्हें आगे बढऩे के अवसर भी दिए, जिसका प्रमाण प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में उनकी सक्रिय भागीदारी से मिलता है।
देशभक्ति गीतों के बीच विभाजन की त्रासदी की यादें हुई ताजा
कार्यकम में देशभक्ति गीतों की धुन के बीच विभाजन की त्रासदी की यादें एक बार फिर ताजा हो गई और पूरा पांडाल भावुक हो उठा। कलाकारों ने विभाजन की त्रासदी को एक नाटक के माध्यम से बड़े ही मार्मिक ढंग से पेश किया, जिसने उस दौर के माहौल, पीड़ा और हालात को जीवंत कर दिया। दर्शकों ने इस प्रस्तुति की सराहना करते हुए पूरे पांडाल को तालियों से गुंजायमान कर दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में प्रदेशभर से आमजन ने हिस्सा लिया और देश के इतिहास के सबसे पीड़ादायक अध्यायों में से एक को याद किया।
हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

