गुरुग्राम: विभाजन विभिषिका की घटनाओं को इतिहास में संजोय रखें: मनोहर लाल

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गुरुग्राम: विभाजन विभिषिका की घटनाओं को इतिहास में संजोय रखें: मनोहर लाल


-युवाओं को जागरूक करने के लिए राष्ट्रीय पाठयक्रमों में किया जाए लागू

गुरुग्राम, 14 अगस्त (हि.स.)। केन्द्रीय ऊर्जा एवं आवासन मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि विभाजन विभिषिका की घटनाओं को इतिहास में संजोय रखने और हर परिवार युवाओं को जागरूक करने के लिए इसे राष्ट्रीय पाठयक्रमों में लागू किया जाए। केन्द्रीय ऊर्जा एवं आवासन मंत्री शुक्रवार काे गुरूग्राम में आयोजित राज्य स्तरीय विभाजन विभिषिका स्मृति दिवस को सम्बोधित कर रहे थे। इससे पूर्व उन्होंने स्मृति की दीवार पर पुष्प अर्पित कर दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद नितिन नबीन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह, राज्यसभा सांसद संजय भाटिया, भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता, सांसद एवं विधायकगण, हरियाणा सरकार के मंत्रीगण, संत-महात्मा, पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर पाठयक्रमों में लागू किए जाने से हरियाणा के साथ-साथ देशभर के युवाओं को विभाजन विभिषिका की जानकारी मिलेगी। इसके अलावा युवाओं में राष्ट्रीय एकता और देश भक्ति की भावना भी बढ़ेगी। इससे युवाओं को देश के लिए प्रेरणा मिलेगी और वे राष्ट्र के लिए जीवन समर्पण करना सीखेंगे। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि दुनिया में अनेक घटनाएं हुई। यूक्रेन युद्ध, यूरोप में द्वितीय युद्ध हुआ, लेकिन इतने लोग नहीं मारे गए। विभाजन विभिषिका की त्रासदी के दौरान 70 लाख से अधिक लोग मारे गए और शहीद हो गए। डेढ से दो करोड़ परिवार विस्थापित हुए। इन घटनाओं पर विचार करें तो मन बड़ा दुखी और विचलित हो जाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विभाजन विभिषिका मनाने की घोषणा करके बड़ा ही सराहनीय कार्य किया है।

मनोहर लाल ने कहा कि यह दिन दोहरी भावना का है। विभाजन को याद करते हैं तो भारत माता की आजादी के लिए निकले तथा बंटवारे को याद करते हैं तो पंजाब व बंगाल के दो हिस्से करके भारत माता की दो बाजुएं काट दी गई। लोगों ने भयंकर त्रासदी को झेला। उन्हें यह मालूम नहीं था कि आजादी की इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि देश के नक्शे पर दिल को चीरने वाली दो लकीरें खींच दी गई। लोगों को इंटरनेशनल लाईन की जानकारी नहीं थी। इसलिए दो दिन तक लाखों लोगों को इधर उधर घूमना पड़ा।

मनोहर लाल ने कहा कि जो देश से प्रेम करते थे, उन्हें विभाजन के बाद अम्बाला, कुरूक्षेत्र आदि अनेक जगहों पर कैंपों में रखा गया। आरएसएस, आर्य समाज, सेवा दल आदि संगठनों ने मिलकर सेवा भाव से कार्य कर विस्थापितों को त्रासदी से बाहर निकाला। उस दौरान हिंदू और सिख परिवारों को पाकिस्तान में जाने का लालच दिया गया। लेकिन उन्होंने भारत आने का निर्णय लिया जो देश की संस्कृति से लगाव को दर्शाता है। इससे पूर्व विभाजन विभिषिका पर डोक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई गई। केन्द्रीय राज्य मंत्री राव इन्द्रजीत ने भी विभाजन विभिषिका स्मृति दिवस पर अपने विचार व्यक्त किए। समारोह में संत स्वामी धर्मदेव ने कहा कि 1947 के कतले आम ने बड़े बुजुर्गो, माताओं, बहनों ने ही नहीं बच्चों ने भी कुर्बानी दी। इसे भुलाया नहीं जा सकता।

हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

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