गुरुग्राम: संविधान की मर्यादा का केंद्र है टॉवर ऑफ जस्टिस: नायब सिंह सैनी
गुरुग्राम, 12 जुलाई (हि.स.)।हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि गुरुग्राम में निर्मित अत्याधुनिक 'टावर ऑफ जस्टिस' न्यायिक परिसर संविधान की मर्यादा, न्यायपालिका की गरिमा और नागरिकों के न्याय पर अटूट विश्वास का सशक्त प्रतीक है। वे रविवार को गुरुग्राम में टावर ऑफ जस्टिस के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए आर्थिक प्रगति के साथ-साथ त्वरित, सुलभ एवं पारदर्शी न्याय व्यवस्था भी उतनी ही आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुग्राम आज ज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्टार्टअप और वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बन चुका है। ऐसे शहर में आधुनिक न्यायिक परिसर की स्थापना न्याय व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाएगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में जिस भवन की आधारशिला रखी गई थी, उसका लोकार्पण आज भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के कर कमलों से होना एक प्रेरणादायी एवं ऐतिहासिक संयोग है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के साथ-साथ 'ईज ऑफ जस्टिस' को भी समान महत्व देना होगा। न्याय व्यवस्था ऐसी हो जो सरल, सुलभ, पारदर्शी तथा समयबद्ध हो, ताकि प्रत्येक नागरिक को शीघ्र न्याय मिल सके और आर्थिक विकास को मजबूत कानूनी आधार प्राप्त हो।
सीएम सैनी ने महाभारत के युधिष्ठिर एवं यक्ष संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय न्याय परंपरा का मूल आधार निष्पक्षता, धर्म और सिद्धांत हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गुरु द्रोणाचार्य और माता शीतला देवी की पावन भूमि पर स्थापित यह न्यायिक परिसर आने वाले वर्षों में न्याय, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जनविश्वास को और अधिक सुदृढ़ करेगा। उन्होंने टॉवर ऑफ जस्टिस का जिक्र करते हुए कहा कि दो टावरों में विकसित यह परिसर उत्तर भारत के सबसे बड़े न्यायिक परिसरों में शामिल है। पुराने परिसर की 45 अदालतों की तुलना में यहां 55 आधुनिक अदालत कक्ष स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त परिसर में बैंक, डाकघर, बार लाइब्रेरी, मध्यस्थता केंद्र तथा अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे न्यायिक कार्यप्रणाली अधिक दक्ष, प्रभावी एवं जनहितकारी बनेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पुराने न्यायालय परिसर के एक हिस्से को अधिवक्ताओं के लिए आधुनिक चैंबर्स के निर्माण हेतु समर्पित किया जाएगा, ताकि उन्हें बेहतर और पर्याप्त कार्यस्थल की सुविधा उपलब्ध हो सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

