गुरुग्राम: देश की स्वतंत्रता, एकता, स्वाभिमान व लोकतांत्रिक चेतना का प्रतीक है तिरंगा: शील मधुर

WhatsApp Channel Join Now
गुरुग्राम: देश की स्वतंत्रता, एकता, स्वाभिमान व लोकतांत्रिक चेतना का प्रतीक है तिरंगा: शील मधुर


-22 जुलाई को राष्ट्रीय ध्वज दिवस घोषित करे सरकार

-देशवासियों ने 22 जुलाई के दिन को तिरंगा दिवस मनाने की किया आह्वान

-22 जुलाई 1947 को वर्तमान स्वरूप में आया था हमारा तिरंगा

गुरुग्राम, 08 जुलाई (हि.स.)। हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक और सादर इंडिया मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष शील मधुर ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि 22 जुलाई को विधिवत रूप से राष्ट्रीय ध्वज दिवस घोषित किया जाए। इसे पूरे देश में राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाए। तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं है। यह देश की स्वतंत्रता, एकता, अखंडता, स्वाभिमान और लोकतांत्रिक चेतना का सर्वोच्च प्रतीक है। यह बात उन्होंने बुधवार को यहां पत्रकार वार्ता में कही।

पूर्व डीजीपी शील मधुर ने कहा कि 22 जुलाई 1947 भारतीय इतिहास का गौरवपूर्ण दिन है। इसी दिन संविधान सभा ने स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में वर्तमान स्वरूप वाले तिरंगे को स्वीकार किया था। इसी दिन को वे तिरंगा दिवस घोषित करने की मांग कर रहे हैं। आज से 22 जुलाई तक यानी 15 दिन तक वे तिरंगे के सम्मान में अलग-अलग कार्यक्रम करेंगें। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि आगामी 22 जुलाई को पूरे उत्साह, गरिमा और राष्ट्रीय भावना के साथ राष्ट्रीय ध्वज दिवस मनाया जाए। उन्होंने कहा कि हर नागरिक तिरंगे को सलामी दे। विद्यालय, कॉलेज, सामाजिक संस्थाएं, आवासीय समितियां और व्यापारिक संगठन तिरंगे के गौरव और इतिहास पर कार्यक्रम आयोजित करें। शील मधुर ने कहा कि 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस, 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस की तरह से 22 जुलाई का दिन हमारे लिए अहम और खास है।

यह दिन केवल उत्सव नहीं, बल्कि भारत की एकता, अखंडता और संवैधानिक प्रतिबद्धता को याद करने का अवसर बने।

शील मधुर ने कहा कि वर्ष 2021 से अब तक प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को इस संबंध में कई बार ज्ञापन भेजे जा चुके हैं। आज भी प्रधानमंत्री को पुन: ज्ञापन प्रेषित किया है। उनका मानना है कि तिरंगे के सम्मान से जुड़ी यह जनभावना जल्द ही राष्ट्रीय निर्णय का रूप लेगी। उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति या संस्था का अभियान नहीं है, बल्कि देश के गौरव, राष्ट्रीय अस्मिता और नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति के संस्कारों को मजबूत करने का प्रयास है। हमारा तिरंगा विविधता में एकता की भावना का प्रतिनिधित्व करता है जो हर नागरिक को एक सूत्र में बांधती है। उन्होंने कहा कि आइये तिरंगे के सम्मान में हम अपनी एकता और राष्ट्रीय एकजुटता का परिचय दें। राष्ट्रध्वज का सम्मान ही राष्ट्र के सम्मान का सर्वोच्च रूप है। शील मधुर का कहना है कि इस दिन नई पीढ़ी को यह समझाने का मौका मिलेगा कि तिरंगे का सम्मान औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति हमारे दायित्व और समर्पण की अभिव्यक्ति है।

हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

Share this story