गुरुग्राम: स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज इन टीचर एजुकेशन के छात्रों ने किया रोड जाम

WhatsApp Channel Join Now
गुरुग्राम: स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज इन टीचर एजुकेशन के छात्रों ने किया रोड जाम


-उनकी डिग्री को एनसीटीई से मान्यता नहीं, इसके बिना वे कहीं के नहीं

गुरुग्राम, 05 अक्टूबर (हि.स.)। स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज इन टीचर एजुकेशन (एसआईएएसटीई) गुरुग्राम के छात्रों ने सोमवार को एनसीटीई मान्यता को लेकर सोमवार को जोरदार प्रदर्शन किया। चार साल से डिग्री के लिए भटक रहे छात्रों ने सोमवार को यहां राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के बाहर सडक़ जाम की। सरकार और शिक्षा विभाग के खिलाफ नारेबाजी की।

सडक़ जाम कर बैठे छात्रों का आरोप है कि कोरोना काल में 2021 में शुरू किए गए बीए-बीएड और बीएससी-बीएड के चार वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स को आज तक नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) से मान्यता ही नहीं मिली है। बीए-बीएड में 30 और बीएससी-बीएड में 70 सीटों पर सेंट्रल लेवल की परीक्षा पास कर देशभर से करीब 400 छात्रों ने दाखिला लिया था। छात्रों का कहना है कि दाखिले के समय उन्हें मान्यता के बारे में नहीं बताया गया। अब चार साल का कोर्स पूरा होने के बाद उन्हें डिग्री के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। बिना एनसीटीई मान्यता के इस डिग्री पर कहीं भी टीचर की नौकरी नहीं मिलेगी। उनकी चार साल की मेहनत बर्बाद हो गई है।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने बताया कि वे अपनी मांग को लेकर शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों तक कई बार पहुंच चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। अध्यापक सिर्फ हरियाणा में डिग्री मान्य होने की बात कहकर टाल रहे हैं, जबकि बिना एनसीटीई के डिग्री कहीं मान्य नहीं है। छात्रों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द उनकी डिग्री को एनसीटीई से मान्यता नहीं दिलाई गई तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। प्रदर्शनकारी छात्रों ने यह भी कहा कि कहा कि यह डिग्री बिना एनसीटीई मान्यता के किसी और राज्य में नहीं चल सकती। यहां दूसरे राज्यों से भी विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षा मंत्री ने भी उन्हें निराश किया। अदालत में भी केस चल रहा है। गलती सरकार की है और भुगत विद्यार्थी रहे हैंं। चार साल पढ़ाई के बाद भी हमें नौकरी देने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाएगा। क्योंकि यहां से मिली डिग्री मान्य नहीं होगी।

हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

Share this story