गुरुग्राम: श्रवण कुमार के देश में बढ़ रही वृद्धाश्रमों की संख्या : श्री कौशिक जी महाराज

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गुरुग्राम: श्रवण कुमार के देश में बढ़ रही वृद्धाश्रमों की संख्या : श्री कौशिक जी महाराज


गुरुग्राम: श्रवण कुमार के देश में बढ़ रही वृद्धाश्रमों की संख्या : श्री कौशिक जी महाराज


रिश्तों की मर्यादा पर पूज्य गुरुजी ने विस्तार से किए प्रवचन

गुरुग्राम के ओल्ड ज्यूडिशियल कॉम्पलेक्स में श्रीशिव महापुराण कथा का हुआ समापन

गुरुग्राम, 22 फरवरी (हि.स.)। गौतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला वृंदावन के संचालक एवं विश्व प्रसिद्ध कथावाचक पुराण मनीषी परम पूज्य श्री कौशिक जी महाराज ने कहा कि माता-पिता की सेवा में दो ही नाम सर्वोपरि हैं-राम और श्रवण कुमार। राम ईश्वर हैं और श्रवण कुमार साधारण इंसान हैं। श्रवण कुमार का नाम माता-पिता की सेवा के उदाहरण के रूप में सबसे पहले लिया जाता है। दुख की बात है कि श्रवण कुमार के इस देश में वृद्धाश्रमों की संख्या बढ़ रही है। घर में वृद्धों को सम्मान नहीं मिल रहा। यह हमारी संस्कृति नहीं है। इसलिए माता-पिता की सेवा से पीछे ना हटें। माता-पिता, गुरु की जो सेवा करेगा, उसे दुनिया सम्मान देगी।श्री कौशिक जी महाराज रविवार को ओल्ड ज्यूडिशियल कॉम्पलेक्स में 11 दिवसीय श्रीशिव महापुराण कथा के अंतिम दिन प्रवचन कर रहे थे। महाराज जी ने कहा कि वे जहां भी दीक्षा देते हैं, वहां बार-बार आते हैं। उन्होंने गुरुग्राम में दीक्षा दी है तो यहां बार-बार आएंगे ही। श्री कौशिक जी महाराज ने कहा कि माता-पिता के चरण छूने भर से शिवलिंग पर एक लोटा जल चढ़ाने का फल मिलता है। उन्होंने कहा कि हर माता-पिता अपने बच्चों को बचपन से ही धर्म से भी जोड़ें। उन्हें धार्मिक बनाएं।

पूज्य गुरुजी ने कहा कि अच्छे लोगों का सानिध्य करें। संतों के साथ बैठें। अच्छी किताबें पढ़ें। सत्संग करें। सत्संग करेंगे तो गृहस्थ के काम अच्छे होंगें। सत्संग ही ईश्वर का संग दिला सकता है। साथ ही उन्होंने विदुर नीति पढऩे के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विदुर नीति पढऩे से व्यक्ति किसी के साथ एक रुपये की बेइमारी नहीं करेंगे। महिलाओं का घर में सम्मान करने के लिए आह्वान करते हुए गुरुजी ने कहा कि आपका खानदान ऋणी है, इसलिए इनका नाम गृहिणी है। हर अच्छे काम में इनकी भूमिका, भीड़ रहती है। मंदिर में इनकी भीड़, कथा में इनकी भीड़, चार धाम में इनकी भीड़। पूरे परिवार को ये ही संभालती हैं। इसलिए कभी इनका दिल नहीं दुखाना। इनकी आंखों में आंसु नहीं आने देनना। इसके घर में आने से तरक्की के रास्ते खुलते हैं। देवी स्वरूपी माता-बहनों को सदा सम्मान दिया करें। गुरुजी ने कहा कि जिस घर में भाई अपने भाई का आदर करता है, वह घर अयोध्या बन जाता है। जिस घर में भाई अपने भाई का सम्मान नहीं करता, वहां महाभारत होने से कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने कहा कि अपने बल को धर्म के पर्दे में रखिये। नहीं तो यह बल खतरनाक हो जाएगा। अन्याय करेगा। इसका दुरुपयोग होगा। हमें जो चीज मिली है उसका सदुपयोग होना चाहिए। चाहे धन हो, बल हो या ज्ञान हो।

हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

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