गुरुग्राम: संस्कृत दिवस पर स्कूली बच्चों ने गीत, मंत्र, नाटक से बढ़ाया संस्कृत का गौरव
-सलवान पब्लिक स्कूल में मनाया गया संस्कृत दिवस
गुरुग्राम, 27 अगस्त (हि.स.)। संस्कृत भाषा के गौरव, महत्व एवं व्यापक उपयोगिता को रेखांकित करने के उद्देश्य से संस्कृत दिवस सलवान पब्लिक स्कूल में भव्यता से मनाया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि, सम्मान एवं गौरव की भावना उत्पन्न करना तथा भारतीय संस्कृति और ज्ञान-परंपरा से उन्हें परिचित कराना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप-प्रज्ज्वलन एवं ऋग्वेद के अग्नि सूक्त के मंत्रों के द्वारा मंगलाचरण के साथ हुआ। इसके पश्चात विद्यार्थियों द्वारा प्रार्थना प्रस्तुत की गई। वातावरण को आध्यात्मिक एवं सकारात्मक ऊर्जा से भरते हुए विद्यार्थियों ने सूर्याराधना मंत्र ओऊम सूर्याय नम: इत्यादि मंत्रों का सामूहिक उच्चारण किया। इसके बाद विद्यार्थियों ने मधुर एवं मनमोहक संस्कृत गीत-गायन सादरं समीहतां वंदना विधीयताम की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में संस्कृत के युगपुरुष के माध्यम से संस्कृत भाषा के विकास, संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले महान व्यक्तित्वों कालिदास, पाणिनि आदि के कार्यों को प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात संस्कृत आराधना शीर्षक से सुंदर नृत्य प्रस्तुति दी गई, जिसने भारतीय संस्कृति एवं संस्कृत भाषा की भावनात्मक अभिव्यक्ति को दर्शाया। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण अस्माकं गौरवम नामक नाटक रहा।
कार्यक्रम के दौरान प्रभारी प्रधानाचार्या डॉ. सुनीता जाखड़ ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में संस्कृत भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध ज्ञान-परंपरा, संस्कृति, दर्शन, साहित्य एवं वैज्ञानिक चिंतन की आधारभूत भाषा है। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कृत को केवल एक विषय के रूप में न लेकर उसके वास्तविक मूल्य और जीवन से जुड़े महत्व को समझने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020) के संदर्भ में भी संस्कृत की महत्ता पर चर्चा की। उन्होंने कि नई शिक्षा नीति भारतीय भाषाओं, संस्कृति एवं परंपरागत ज्ञान को शिक्षा के साथ जोडऩे पर विशेष बल देती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आज के समय में संस्कृत का ज्ञान केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षण, शोध, योग, आयुर्वेद, भारतीय दर्शन, अनुवाद, डिजिटल माध्यम एवं विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों में भी इसका महत्त्व बढ़ रहा है। उन्होंने संस्कृत को हमारे गौरव की भाषा बताते हुए विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे संस्कृत के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करें। अपने दैनिक जीवन में सरल संस्कृत शब्दों एवं वाक्यों का प्रयोग करने का प्रयास करें।
हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

