गुरुग्राम: श्रीदुर्गा रामलीला में राम जन्म पर अयोध्या नगरी जैसा रहा माहौल

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गुरुग्राम: श्रीदुर्गा रामलीला में राम जन्म पर अयोध्या नगरी जैसा रहा माहौल


गुरुग्राम, 11 अक्टूबर (हि.स.)। जैकबपुरा स्थित श्री दुर्गा रामलीला के 61वें रामलीला महोत्सव के दूसरे दिन भगवान श्रीराम के जन्म की लीला ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। प्रभु श्रीराम के जन्म के साथ ही पूरा रामलीला परिसर अयोध्या नगरी में परिवर्तित होता नजर आया। ढोल-नगाड़ों, भजनों और बधाइयों के बीच श्रद्धालुओं ने नाच-गाकर खुशियां मनाईं।

राम जन्म की लीला से पहले मंच पर दिखाया गया कि राक्षसों के अत्याचार से धरती और देवता परेशान हैं। राक्षसों के बढ़ते आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए देवताओं ने भगवान विष्णु की आराधना की और उनसे पृथ्वी पर अवतार लेकर अधर्म का नाश करने की प्रार्थना की। इसके बाद कथा राजा दशरथ के दरबार में पहुंची, जहां तीन रानियां होने के बावजूद संतान सुख से वंचित राजा दशरथ चिंतित नजर आए। राजा दशरथ अपनी व्यथा लेकर गुरु वशिष्ठ के आश्रम पहुंचे। उन्होंने संतान प्राप्ति की इच्छा व्यक्त करते हुए अपनी पीड़ा बताई। गुरु वशिष्ठ ने उन्हें पुत्रेष्टि यज्ञ कराने का सुझाव दिया। इसके बाद राजा दशरथ ने ऋषि के मार्गदर्शन में यज्ञ करवाया। इस दृश्य को शृंगेरी शारदा पीठ वेद पाठशाला के विद्यार्थियों ने वैदिक मंत्रों के सस्वर उच्चारण से अत्यंत जीवंत बना दिया।

मंत्रोच्चार और वैदिक परंपरा के अनुरूप हुए यज्ञ ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।

यज्ञ के उपरांत प्राप्त खीर को राजा दशरथ ने अपनी तीनों रानियों ने चार राजकुमारों राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न को जन्म दिया। इसके बाद भगवान शिव के मदारी का रूप धारण कर अयोध्या पहुंचने की मनोहारी लीला दिखाई गई। भगवान शिव अपने आराध्य प्रभु श्रीराम के बाल स्वरूप के दर्शन करने के लिए हाथ में बंदर लेकर मदारी के वेश में पहुंचे। यह प्रसंग श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहा और मंच पर भक्ति तथा वात्सल्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। इसके बाद ऋषि-मुनियों को राक्षसों के अत्याचार से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान श्रीराम द्वारा ताडक़ा वध की लीला का मंचन किया गया। ताडक़ा के वध के बाद सुबाहु और मारीच से जुड़े प्रसंगों ने मंचन को और रोमांचक बना दिया। अधर्म के विरुद्ध धर्म की विजय का संदेश देती इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को रामायण की दिव्य कथा से जोड़ दिया।

हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

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