गुरुग्राम: रेपो रेट बढऩे से निवेश एवं रोजगार पर पड़ सकता है असर: दीपक मैनी
-एमएसएमई के लिए दो प्रतिशत ब्याज सब्सिडी और वर्किंग कैपिटल में राहत की मांग
गुरुग्राम, 21 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के फैसले पर प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (पीएफटीआई) ने चिंता जताई है। संगठन ने सरकार और आरबीआई से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को वित्तीय राहत देने की मांग की है।
पीएफटीआई के चेयरमैन दीपक मैनी ने कहा कि बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा हुआ तो छोटी इंडस्ट्री के लिए कारोबार चलाना और उसका विस्तार करना मुश्किल हो सकता है। ब्याज पर बढऩे वाला खर्च उद्योगों के मुनाफे को घटाएगा, वहीं नई मशीनरी खरीदने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और कर्मचारियों की भर्ती की योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि महंगाई पर नियंत्रण के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है, लेकिन इसका दबाव छोटी औद्योगिक इकाइयों पर अधिक पड़ता है। रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी का असर उन कर्जों पर पड़ सकता है, जिनकी ब्याज दर इससे जुड़ी है। ऐसे ऋणों पर ब्याज भुगतान बढऩे से उद्योगों का मासिक खर्च बढ़ सकता है। हालांकि, सभी कर्जों की ब्याज दर तुरंत नहीं बढ़ती। इसका असर बैंक की दरों और कर्ज की शर्तों पर निर्भर करेगा।
मैनी के मुताबिक, छोटी इकाइयों के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर कच्चे माल और दूसरे खर्चों का दबाव रहता है, वहीं दूसरी ओर कैश क्रेडिट और वर्किंग कैपिटल पर ब्याज बढऩे से कारोबार के लिए उपलब्ध नकदी कम हो सकती है। पीएफटीआई ने सरकार और आरबीआई से एमएसएमई क्षेत्र के लिए दो प्रतिशत तक ब्याज सब्सिडी लागू करने, भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के माध्यम से बिना गारंटी वाले वर्किंग कैपिटल की सीमा बढ़ाने और एमसीएलआर आधारित कर्ज पर बढ़ी ब्याज दरों के प्रभाव के लिए 90 दिन का संक्रमणकाल देने की मांग की है। मैनी ने चेतावनी दी कि रेपो रेट 5.75 प्रतिशत के पार जाने पर छोटे उद्योगों की वित्तीय स्थिति और नाजुक हो सकती है।
हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

