गुरुग्राम: चर्चाओं का वास्तविक महत्व धरातल पर कर्म के रूप में दिखाई देना: प्रो. वी.के. पॉल

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गुरुग्राम: चर्चाओं का वास्तविक महत्व धरातल पर कर्म के रूप में दिखाई देना: प्रो. वी.के. पॉल


-ओआरसी बोहड़ाकलां में हुआ डिस्कवर, डिजाइन एंड ट्रांसफॉर्म सम्मेलन

-साइंस और साइलेंस के समन्वय पर हुआ मंथन

गुरुग्राम, 12 सितंबर (हि.स.)। बोहड़ा कलां स्थित ब्रह्माकुमारीज संस्थान के ओम शांति रिट्रीट सेंटर में शनिवार को साइंटिस्ट्स, इंजीनियर्स एवं आर्किटेक्ट्स के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का औपचारिक शुभारंभ हुआ। डिस्कवर, डिजाइन एंड ट्रांसफॉर्म विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देशभर से आए प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और वास्तुकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आधुनिक विज्ञान और आध्यात्मिक मूल्यों के मेल से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।

स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) के निदेशक प्रो. वी.के. पॉल ने कहा कि अकादमिक या वैचारिक चर्चाओं का वास्तविक महत्व तभी है जब वे धरातल पर कर्म के रूप में दिखाई दें। उन्होंने जोर दिया कि जिम्मेदारियों को ठोस परिणाम में बदलना ही आध्यात्मिकता का असली मकसद है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व महानिदेशक हरि बाबू श्रीवास्तव ने अहंकार को प्रगति की राह में सबसे बड़ी बाधा बताया। उन्होंने कहा कि सही दिशा में कर्म करने की प्रेरणा केवल सच्चे ज्ञान से मिलती है। संस्थान के साइंटिस्ट्स, इंजीनियर्स एवं आर्किटेक्ट्स प्रभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजयोगी बीके मोहन सिंघल ने कहा कि राजयोग के नियमित अभ्यास से न केवल जीवन संवरता है, बल्कि यह व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारियों को अधिक कुशलता से निभाने और बेहतर प्रबंधन (मैनेजमेंट) की कला भी सिखाता है।

ओआरसी की निदेशिका राजयोगिनी बीके आशा दीदी ने कहा कि आध्यात्मिकता जीवन में विनम्रता और शांति का संचार करती है। विज्ञान के बड़े से बड़े आविष्कार भी मौन की गहराइयों से जन्म लेते हैं। साइंस और साइलेंस एक-दूसरे के पूरक हैं। जब हमारे विचार श्रेष्ठ और सकारात्मक होंगे, तभी एक सुंदर और नई दुनिया का निर्माण संभव हो सकेगा। राजयोग का निरंतर अभ्यास मन और बुद्धि पर नियंत्रण सिखाता है। जब मन शुद्ध होता है, तो उससे जनहितकारी और नए आविष्कार जन्म लेते हैं।

प्रभाग के राष्ट्रीय संयोजक राजयोगी बीके भारत भूषण ने कहा कि आध्यात्मिक शक्ति ही मनुष्य को विपरीत परिस्थितियों और आपदाओं के बीच अवसर तलाशने का धैर्य देती है। कार्यक्रम के दौरान दिल्ली प्रभाग के क्षेत्रीय संयोजक बीके पीयूष ने प्रभाग द्वारा जनहित में चलाई जा रही विभिन्न सेवाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। सम्मेलन में देश के कई अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे, जिनमें मुख्य रूप से ग्लोबल क्वांटम फोरम के प्रसिद्ध वैज्ञानिक अनुपम प्रकाश, सी-डैक की सहयोगी निदेशक प्रो. प्रियंका जैन, एनआइटीटीटीआर चंडीगढ़ के निदेशक प्रो. भोलाराम गुर्जर, आइओसी की मुख्य महाप्रबंधक अंजलि भावे, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्लूडी), चंडीगढ़ क्षेत्र के अपर महानिदेशक कमल कुमार एवं आइओसी के कार्यकारी निदेशक सर्वेश कुमार शामिल रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

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