गुरुग्राम: बिल विवाद में मेदांता ने शव रोका, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की चेतावनी के बाद परिजनाें सौंपा
-उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर निवासी युवक की मौत के बाद लाखों का बिल थमाया
गुरुग्राम, 01 सितंबर (हि.स.)। मेदांता मेडिसिटी अस्पताल में उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर निवासी 30 वर्षीय युवक की मौत के बाद बिल विवाद का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि 23 लाख रुपए लेने के बाद भी अस्पताल 18 लाख और मांग रहा था और शव नहीं दे रहा था। मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंचने और आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो की सख्त पोस्ट के बाद अस्पताल ने बिना बकाया लिए शव परिजनों को सौंप दिया।
परिजनों के मुताबिक युवक को गंभीर हालत में मेदांता में भर्ती कराया गया था। जमा-पूंजी और उधार लेकर उन्होंने 23 लाख रुपए अस्पताल को दिए, लेकिन इलाज के दौरान युवक की मौत हो गई। मौत के बाद अस्पताल ने 18 लाख रुपए का अतिरिक्त बिल बताया। परिजनों ने इतनी बड़ी राशि तुरंत देने में असमर्थता जताई और शव सौंपने की गुहार लगाई।
मामला एनएचआरएस तक पहुंचा। आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा-गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में शाहजहांपुर निवासी 30 वर्षीय युवक की मृत्यु के बाद उसका शव परिजनों को नहीं सौंपा जा रहा है। परिजन 23 लाख भर चुके हैं, अभी 18 लाख और मांगा जा रहा है। अस्पताल न तो प्रशासन की बात मान रहा है, न सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर और न एनएचआरसी की गाइडलाइन फॉलो कर रहा है। अब इस अस्पताल का इलाज करने मैं स्वयं जा रहा हूं। अध्यक्ष की चेतावनी के बाद अस्पताल प्रबंधन में हडक़ंप मचा और बिना शर्त शव परिजनों को सौंप दिया गया। शव मिलने के बाद परिजन शाहजहांपुर के लिए रवाना हो गए।
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि युवक को किस बीमारी के चलते भर्ती कराया गया था। अस्पताल की ओर से भी आधिकारिक बयान नहीं आया है। सुप्रीम कोर्ट और एनएचआरसी की गाइडलाइन कहती है कि बिल बकाया होने पर शव को बंधक नहीं बनाया जा सकता। यह मानवाधिकार और मृतक की गरिमा का उल्लंघन है। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने अस्पताल की आलोचना करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।
हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

