गुरुग्राम: हार्ट अटैक से पहले सीने में दर्द का इंतजार करना हो सकता है जानलेवा

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गुरुग्राम: हार्ट अटैक से पहले सीने में दर्द का इंतजार करना हो सकता है जानलेवा


-भारत में कुल मौतों में 28.1 प्रतिशत हिस्सा हार्ट अटैक व रक्त वाहिकाओं की बीमारियों का

-गुरुग्राम में शुरू हुआ इको एशिया/इको इंडिया-2026 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दी गई जानकारी

गुरुग्राम, 08 अक्टूबर (हि.स.)। डब्ल्यूएचओ की अक्टूबर 2026 की नई रिपोर्ट के अनुसार 2023 में इस्केमिक हार्ट डिजीज से दुनियाभर में लगभग 95 लाख मौतें हुईं, जो मौत का सबसे बड़ा कारण है। भारत में आईसीएमआर 2026 के आंकड़ों के मुताबिक कुल मौतों में 28.1 प्रतिशत हिस्सा हार्ट और रक्त वाहिकाओं की बीमारियों का है, जिसमें 80 प्रतिशत योगदान हार्ट अटैक और स्ट्रोक का है। यह अहम जानकारी गुरुवार को यहां लीला होटल में शुरू हुए तीन दिवसीय इको एशिया/इको इंडिया-2026 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दी गई।

यह सम्मेलन शेपिंग द न्यू इरा ऑफ कार्डिएक इमेजिंग थीम पर आयोजित किया जा रहा है।

इस सम्मेलन के पहले दिन विशेषज्ञों ने कहा कि हार्ट अटैक से पहले सीने में दर्द का इंतजार करना जानलेवा हो सकता है। हृदय में शुरुआती बदलाव लक्षण दिखने से महीनों-वर्षों पहले ही शुरू हो जाते हैं। बिना लक्षण के भी हार्ट की बीमारी शुरू हो जाती है। विशेषज्ञों ने कहा कि कहा कि आधुनिक इमेजिंग और एआई की मदद से छिपी हुई हृदय बीमारी को समय रहते पकड़ा जा सकता है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि बॉडी बनाने के लिए लोग जिम भी जा रहे हैं। मैराथनों में भी भाग ले रहे हैं। जिम में और मैराथन में भाग लेने के दौरान मौतोंं की संख्या बढ़ रही है। एग्जीक्यूटिव ऑर्गनाइजिंग प्रेसिडेंट आईएई डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा हृदय रोग में लक्षणों का इंतजार करना सही तरीका नहीं है।

सम्मेलन में स्टेज-बी हार्ट फेल्योर पर विशेष चर्चा हुई। इस स्टेज में मरीज को कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, लेकिन दिल की बनावट और काम करने के तरीके में बदलाव शुरू हो चुके होते हैं। साइंटिफिक कमेटी आईएई चेयरमैन डॉ. हंसा गुप्ता ने कहा कि इकोकार्डियोग्राफी और स्ट्रेन इमेजिंग जैसी जांचें दिल की कार्यक्षमता में हो रहे शुरुआती बदलावों को पहचानने में मदद करती हैं। इंटरनेशनल चेयरमैन डॉ. जे. ओह ने कहा कि कई डायबिटिक मरीजों को सीने में दर्द नहीं होता, लेकिन दिल की मांसपेशियों में बदलाव शुरू हो चुके होते हैं। इसलिए डायबिटीज की देखभाल सिर्फ ब्लॉकेज की जांच तक सीमित नहीं होनी चाहिए।

इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के अनुसार 2024 में भारत में 8.98 करोड़ वयस्क डायबिटीज से पीडि़त थे। इस दौरान नेशनल चेयरमैन डा. एचके चोपड़ा ने कहा कि बड़ी चुनौती इस तकनीक को विशेषज्ञ केंद्रों से निकालकर आम आबादी तक पहुंचाने की है। आईएसीसी चेयरमैन डा. कपिल खन्ना ने कहा इकोकार्डियोग्राफी अब सिर्फ बीमारी पहचानने की जांच नहीं है। यह गैर-आक्रामक, बिना रेडिएशन वाली और दोहराई जा सकने वाली जांच है जो इलाज के साथ भविष्य के जोखिम को समझने में भी मदद करती है।

हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

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