गुरुग्राम: व्यापारियों के अरबों रुपये एसजीएसटी में अटके: अशोक बुवानीवाला
-जीएसटी क्रेडिट सेट-ऑफ के पेच में फंसी कारोबारियों की पूंजी
-ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से पहले जीएसटी की जटिलताओं को दूर करे सरकार
-सरकार से नियम सरल करने की करी मांग
गुरुग्राम, 08 अक्टूबर (हि.स.)। जीएसटी के टैक्स क्रेडिट सेट-ऑफ के जटिल नियमों के कारण देशभर के लाखों व्यापारियों और उद्यमियों की कार्यशील पूंजी फंस गई है। यह गंभीर चिंता का विषय है। राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने इस व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताते हुए सरकार से जीएसटी प्रणाली को अधिक सरल, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाने की मांग की है।
अशोक बुवानीवाला ने कहा कि वर्तमान जीएसटी व्यवस्था में आईजीएसटी, सीजीएसटी और एसजीएसटी के सेट-ऑफ की जो प्रक्रिया अपनाई जा रही है, वह कारोबारियों के लिए नकदी संकट पैदा कर रही है। कारोबारियों के खातों में जमा वैध टैक्स क्रेडिट का समय पर समायोजन या रिफंड नहीं हो पा रहा है। जिससे उनकी पूंजी महीनों तक सरकारी खाते में अटकी रहती है। विस्तार से जानकारी देते हुए अशोक बुवानीवाला ने कहा कि मौजूदा नियम कारोबारियों की नकदी प्रवाह पर सीधा असर डाल रहा है। जब कोई कारोबारी दूसरे राज्य से माल खरीदता है, तो उसे खरीद पर आईजीएसटी चुकाना पड़ता है। बाद में जब वही माल वह अपने राज्य में बेचता है, तो वह ग्राहक से सीजीएसटी और एसजीएसटी वसूलता है।
उन्होंने कहा कि नियम के अनुसार खरीद पर चुकाए गए आईजीएसटी के क्रेडिट का सेट-ऑफ पहले सीजीएसटी में होता है और सीजीएसटी का कोटा पूरा होने के बाद ही बची हुई राशि का समायोजन एसजीएसटी में किया जाता है। इस क्रम के चलते बड़ी रकम लंबे समय तक एसजीएसटी क्रेडिट के रूप में अटकी रहती है, जबकि कारोबारी को बैंक से कार्यशील पूंजी पर भारी ब्याज चुकाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि देशभर के कारोबारियों के अरबों रुपये इस तरह एसजीएसटी क्रेडिट के रूप में सरकार के पास जमा हैं, लेकिन उसका तत्काल रिफंड या सेट-ऑफ नहीं हो रहा है। इससे छोटे और मध्यम कारोबारियों पर सबसे ज्यादा मार पड़ रही है। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि व्यापारी वर्ग पहले ही पूरी ईमानदारी से समय पर टैक्स का भुगतान कर रहा है, ऐसे में उनके वैध इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) को रोकना न्यायसंगत नहीं है। जीएसटी का मूल उद्देश्य व्यापार को आसान बनाना और कर व्यवस्था में पारदर्शिता लाना था, न कि प्रक्रिया की जटिलताओं में पूंजी को रोकना।
हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

