गुरुग्राम: हरियाणा विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर गोपीचंद गहलोत का निधन

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गुरुग्राम: हरियाणा विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर गोपीचंद गहलोत का निधन


गुरुग्राम: हरियाणा विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर गोपीचंद गहलोत का निधन


गुरुग्राम: हरियाणा विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर गोपीचंद गहलोत का निधन


-वर्ष 2000 में निर्दलीय विधायक बनकर बने थे डिप्टी स्पीकर

-राजनीतिक, सामाजिक क्षेत्र के लोगों ने उनके निधन पर जताया शोक

गुरुग्राम, 11 अप्रैल (हि.स.)। हरियाणा के पूर्व डिप्टी स्पीकर गोपीचंद गहलोत का शनिवार को यहां 75 साल की उम्र में निधन हो गया। 19 जनवरी 1951 को जन्में गोपीचंद गहलोत पिछले करीब चार साल से किडनी की बीमारी से ग्रस्त थे। डायलिसिस पर थे। अपने घर पर ही उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन पर राजनीतिक, सामाजिक क्षेत्र के लोगों ने शोक जताया है। भगवान से उनकी आत्मा की शांति की कामना की है।

बता दें कि गोपीचंद गहलोत गुडग़ांव विधानसभा से वर्ष 2000 में निर्दलीय विधायक बनें थे। बीजेपी से बगावत करके गोपीचंद गहलोत ने गुडग़ांव से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था। उनके सामने मजबूत उम्मीदवार के रूप में कांगे्रस के तीन बार के विधायक धर्मबीर गाबा थे। धर्मबीर गाबा को हराकर वे विधायक बनें और उस समय इनेलो की बनीं सरकार को उन्होंने समर्थन दे दिया। इनेलो सरकार ने उन्हें हरियाणा विधानसभा में डिप्टी स्पीकर का पद देकर सम्मान दिया। गोपीचंद गहलोत ने गुडग़ांव विधानसभा सीट से तीन बार किस्मत आजमायी। मजबूती से उन्होंने हर चुनाव लड़ा, लेकिन दो चुनाव में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। वर्ष 2000 में तीसरे मुकाबले में गुडग़ांव की जनता ने जीत का सेहरा उनके सिर पर सजाया। गोपीचंद गहलोत निर्दलीय चुनाव लडऩे से पहले भाजपा में ही थे। वर्ष 2000 में भाजपा को अलविदा करने के बाद 19 साल बाद 13 जुलाई 2019 को उन्होंने फिर से भाजपा में आस्था दिखाते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में भाजपा ज्वाइन की।उन्होंने भारतीय जनता पार्टी वे वर्ष 1987 और वर्ष 1991 में हुए विधानसभा चुनाव में टिकट मांगी। दोनों ही चुनाव में भाजपा ने उन्हें निराश किया। 1991 के चुनाव में वे निर्दलीय लड़े, लेकिन हार गये। 1996 का चुनाव उन्होंने समता पार्टी की टिकट पर लड़ा। यह उनका दूसरा चुनाव था। इस चुनाव में भी उन्हें सफलता नहीं मिली। तीसरी बार 2000 के चुनाव में निर्दलीय चुनाव लड़ा। इस बार गुडग़ांव की जनता ने उन्हें चुनाव जीताकर विधानसभा पहुंचाया। इस चुनाव में गोपीचंद गहलोत ने कांग्रेस नेता धर्मबीर गाबा के विजय रथ पर ब्रेक लगाते हुए 40493 वोटों से जीत दर्ज की। धर्मबीर गाबा 25181 वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहे थे।वर्ष 2000 में 47 सीटें लेकर बनी इनेलो सरकार को गोपीचंद गहलोत ने समर्थन दिया। इनेलो सरकार में उन्हें डिप्टी स्पीकर के पद से नवाजा गया। गुडग़ांव विधानसभा सीट से गोपीचंद गहलोत के सामने इनेलो ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था। उस चुनाव में पूरे प्रदेश में 11 निर्दलीय चुनाव जीते थे। कांग्रेस के 21 और भाजपा के छह उम्मीदवारों ने चुनाव जीता था। भाजपा सरकार बनने के बाद गोपीचंद गहलोत ने इनेलो को अलविदा कहकर भाजपा का दामन था। भाजपा ने उन्हें प्रदेश कार्यकारिणी में सदस्य बनाया था।

हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

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