गुरुग्राम में कैमिस्ट्स की हड़ताल का नहीं दिखा असर

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गुरुग्राम में कैमिस्ट्स की हड़ताल का नहीं दिखा असर


-दवा विक्रेताओं ने मरीजों को नहीं होने दी कोई दिक्कत

गुरुग्राम, 20 मई (हि.स.)। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर बुधवार को देशभर में बुलाई गई एक दिवसीय केमिस्ट हड़ताल का गुरुग्राम में कोई असर नजर नहीं आया। गुडग़ांव ड्रगिस्ट एंड कैमिस्ट एसोसिएशन ने हड़ताल को सिरे से खारिज करते हुए जिले के सभी मेडिकल स्टोर सामान्य दिनों की तरह खुले रखे। एसोसिएशन के इस फैसले से शहर के हजारों मरीजों को बड़ी राहत मिली और दवा आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी रही।

गुडग़ांव ड्रगिस्ट एंड कैमिस्ट एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष शरद मेहरोत्रा ने कहा कि गुरुग्राम जिला व नूंह जिला में 3000 कैमिस्ट पंजीकृत हैं। दोनों जिलों में इस हड़ताल का कोई असर नहीं है। चुनिंदा दुकानों को छोडक़र लगभग सभी दवा विक्रेताओं ने हड़ताल में शामिल होने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि हमारा पहला कर्तव्य मरीजों के प्रति है। सचिव नीरज जैन ने कहा कि दवा जैसी आवश्यक सेवा को बंद करना जनहित में नहीं है। इसलिए हमने सर्वसम्मति से दुकानें खोलने का निर्णय लिया। उन्होंने दावा किया कि किसी भी मरीज को दवा के लिए भटकना नहीं पड़ा। गुरुग्राम में मेडिकल स्टोर्स पर रोज की तरह भीड़ दिखी। ओल्ड रेलवे रोड पर दवा खरीदने आए पालम विहार निवासी रमेश अग्रवाल ने कहा कि शुगर की दवा रोज लेनी होती है। हड़ताल की खबर से टेंशन थी, लेकिन दुकान खुली देखकर जान में जान आई। स्थानीय केमिस्टों का कहना है कि गुरुग्राम में हर दिन लाखों लोग दवा पर निर्भर हैं। आईटी-बीपीओ शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारी, डिलीवरी एजेंट, बुजुर्ग और क्रॉनिक बीमारियों के मरीजों के लिए एक दिन की हड़ताल भी भारी पड़ सकती है। सेक्टर-31 के केमिस्ट विकास शर्मा बोले, हम सरकार से लड़ेंगे, मगर मरीज को तकलीफ देकर नहीं। हड़ताल आखिरी विकल्प है।

ऑनलाइन दवा बिक्री का विरोध, मगर हड़ताल तरीका नहीं

शरद मेहरोत्रा ने स्पष्ट किया कि गुडग़ांव ड्रगिस्ट एंड कैमिस्ट एसोसिएशन भी अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री, फर्जी ई-प्रिस्क्रिप्शन और डीप डिस्काउंटिंग का कड़ा विरोध करती है। छोटे केमिस्टों का धंधा चौपट हो रहा है। हम चाहते हैं कि सरकार ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट में बदलाव कर ऑनलाइन बिक्री को रेगुलेट करे। उन्होंने कहा कि विरोध का तरीका हड़ताल नहीं, बल्कि ज्ञापन, संवाद और कानूनी लड़ाई होना चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

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