गुरुग्राम: अपने खून से दूसरों का जीवन बचाने वाले योद्धा बने हैं राजेश डुडेजा

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गुरुग्राम: अपने खून से दूसरों का जीवन बचाने वाले योद्धा बने हैं राजेश डुडेजा


-अब तक 149 बार कर चुके हैं रक्तदान, युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत

-क्षेत्र में रक्तवीर के नाम से भी जाने जाते हैं राजेश डुडेजा

भिवानी/गुरुग्राम, 15 सितंबर (हि.स.)। अपने खून से इंसानियत की कहानी लिखकर रक्तदान क्षेत्र में योद्धा बने राजेश डुडेजा का मानव जीवन की रक्षा के प्रति अटूट समर्पण है। वे एक अनूठी मिसाल बने, शहर के रक्तदान में योद्धा बने शतकवीर राजेश डुडेजा लगातार रक्तदान कर रहे हैं। अब तक वे 149 बार रक्तदान करके कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। उनकी इस अतुलनीय सेवा और युवाओं को रक्तदान के प्रति निरंतर प्रेरित करने के प्रयासों को देखते हुए उपायुक्त साहिल गुप्ता ने उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया।

सम्मान समारोह के दौरान उपायुक्त साहिल गुप्ता ने राजेश डुडेजा के नि:स्वार्थ प्रयासों की प्रशंसा की।

उपायुक्त ने कहा कि राजेश डुडेजा जैसे समाजसेवी हमारे जिले और पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय हैं। 149 बार रक्तदान करना कोई साधारण उपलब्धि नहीं है, यह जीवन बचाने के प्रति किसी व्यक्ति की गहरी निष्ठा को दर्शाता है। एक यूनिट रक्त किसी जरूरतमंद परिवार की खुशियां लौटा सकता है। प्रशासन ऐसे समाजसेवियों का सदैव सम्मान करता है और उम्मीद करता है कि युवा वर्ग इनसे प्रेरणा लेकर बढ़-चढकऱ रक्तदान अभियानों में हिस्सा लेगा। राजेश डुडेजा का यह सफर केवल एक आंकड़े तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अनगिनत लोगों की जिंदगी बचाने की कहानियां छिपी हैं। अपने इस सेवा सफर में उन्होंने 98 बार होल ब्लड (सामान्य रक्तदान) किया है, जबकि आपातकालीन स्थितियों में मरीजों की जरूरत को देखते हुए 51 बार प्लेटलेट्स डोनेट की हैं।

गंभीर मरीजों को प्लेटलेट्स भी देते हैं राजेश

जब भी किसी अस्पताल में गंभीर मरीजों को प्लेटलेट्स की अति आवश्यकता हुई, राजेश डुडेजा मदद के लिए हमेशा तत्पर रहे। सम्मान प्राप्त करने के बाद भावुक और उत्साहित राजेश डुडेजा ने अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि उपायुक्त द्वारा मिला यह सम्मान उनके इस सेवा पथ को और मजबूती प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने यह राह किसी पुरस्कार के लिए नहीं, बल्कि किसी तड़पते मरीज और उसके चिंतित परिजनों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए चुनी थी। जब तक उनका स्वास्थ्य अनुमति देगा, वे रक्तदान करते रहेंगे। उनका लक्ष्य केवल खुद रक्तदान करना नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक यह संदेश पहुंचाना है कि रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित और स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।

हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

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