गुरुग्राम: अच्छी पैदावार के लिए एसएसपी व एनपीके के प्रयोग की सलाह

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-तिलहन फसलों के लिए फायदेमंद है एसएसपी का प्रयोग

गुरुग्राम, 14 अक्टूबर (हि.स.)। जिला में रबी फसलों की बुवाई का सीजन शुरू हो गया है। इसलिए किसानों को दो मुख्य बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए। पहला, बीज व दूसरा, उर्वरक। अगर बीज का चुनाव सही है लेकिन सही उर्वरक का प्रयोग नहीं किया तो यह फसल की उत्पादन क्षमता पर भी प्रभाव डालता है। किसान डीएपी(डाई अमोनियम फॉस्फेट) की बजाय एसएसपी यानी सिंगल सुपर फॉस्फेट अथवा एनपीके का प्रयोग करें।

डीसी निशांत कुमार यादव ने कहा कि सरसों एक तिलहन फसल है। इसलिए इसके बेहतर उत्पादन के लिए किसानों को एसएसपी खाद का प्रयोग करना चाहिए। बीज बुवाई से पूर्व एसएसपी का प्रयोग न केवल पौधे की उत्पादन क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि यह फसल की गुणवत्ता की बढ़ोतरी में भी सहायक सिद्ध होता है। वहीं गेहूं की फसल में दाने का साइज़ व उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए एनपीके का प्रयोग कर सकते हैं।

कृषि विभाग में उपनिदेशक डॉ. अनिल तंवर ने बताया कि किसान सरसों की बिजाई के लिए एक एकड़ में 50 किलो डीएपी यानी एक कट्टा खाद का प्रयोग करता है, जिसमें 46 प्रतिशत फास्फेट व 18 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है। यह खाद जमीन में जल्दी घुलनशील होती है इसलिए बीज के अंकुरण के समय पौधे को इसका कम लाभ मिलता है।

एसएसपी का इस तरह से करें प्रयोग

डॉ. तंवर ने बताया कि एक एकड़ में डीएपी के एक कट्टे की तुलना में हमें बीज बुवाई से पूर्व एसएसपी के दो कट्टे का प्रयोग करना होगा। इससे एक एकड़ में फॉस्फेट की मात्रा करीब 31 प्रतिशत हो जाएगी। तिलहन फसलों के आवश्यक तत्व यानी सल्फर की मात्रा करीब 22 प्रतिशत रहेगी। उन्होंने कहा कि सभी किसान खेत मे नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए एसएसपी खाद की बुवाई से पहले एक एकड़ में 25 किलो यूरिया का छिडक़ाव जरूर करें। यूरिया के एक कट्टे में नाइट्रोजन की मात्रा करीब 46 प्रतिशत के करीब है।

हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर हरियाणा

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