गुजरात व हरियाणा के राज्यपालों ने स्वामी श्रद्धानंद के योगदान को किया नमन

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गुजरात व हरियाणा के राज्यपालों ने स्वामी श्रद्धानंद के योगदान को किया नमन


-आचार्य देवव्रत ने गुरुकुल को स्वामी श्रद्धानंद के विचारों की जीवंत धरोहर बताया

चंडीगढ़, 01 नवंबर (हि.स.)। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक एवं शिक्षाविद् स्वामी श्रद्धानंद जी के विचारों, आदर्शों और संकल्पों की जीवंत धरोहर है। स्वामी श्रद्धानंद जी ने इसी भूमि से शुद्धि आंदोलन को गति दी और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी यहां से महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र, समाज और जीवन मूल्यों की स्थापना के लिए समर्पित कर दिया।

आचार्य देवव्रत रविवार को कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल में आयोजित 114वें स्थापना वर्ष समारोह एवं स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान की शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित ‘बलिदान शताब्दी समारोह’ को संबोधित कर रहे थे। आचार्य देवव्रत ने कहा कि गुरुकुल की शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें शारीरिक रूप से बलवान, मानसिक रूप से सक्षम, संस्कारवान और चरित्रवान बनाना है। गुरुकुल के विद्यार्थी ही असली मायने में ‘जेन जी’ हैं, क्योंकि वे शिक्षा के साथ अनुशासन, संस्कार और जीवन मूल्यों को भी आत्मसात करते हैं। उन्होंने बताया कि गुरुकुल के 125 विद्यार्थियों ने एनडीए के माध्यम से सेना में अधिकारी बनने की उपलब्धि हासिल की है, जो संस्थान की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र स्वामी श्रद्धानंद जी के विचारों और उनके द्वारा शुरू किए गए शिक्षा एवं समाज सुधार के कार्यों को आगे बढ़ा रहा है। गुरुकुल में करीब 1500 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और यहां के विद्यार्थियों ने आईआईटी सहित देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिले हासिल किए हैं।

हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने स्वामी श्रद्धानंद जी के जीवन को सत्यनिष्ठा, निर्भीकता, सेवा, त्याग और आत्मबलिदान का अद्वितीय उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी महर्षि दयानंद सरस्वती की महान परंपरा के तेजस्वी प्रतिनिधि थे। उन्होंने शिक्षा को केवल रोजगार प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, आत्मसंयम और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का माध्यम माना। राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि बलिदान का अर्थ केवल मृत्यु का वरण करना नहीं, बल्कि अपने स्वार्थ, भय और सुविधाओं से ऊपर उठकर लोकमंगल के लिए जीवन समर्पित करना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

Livevns.news Desk
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