पानीपत: गीता यूनिवर्सिटी की कैंटीन में लगी भीषण आग में कुक का हाथ झुलसा।
पानीपत, 23 फ़रवरी (हि.स.)। पानीपत स्थित गीता यूनिवर्सिटी परिसर में रविवार की रात कैफे में भीषण आग लग गई। आग गैस सिलेंडर फटने के कारण लगी आग से अफरातफरी मच गई। शुरुआत में लपटे कम होने के कारण वहां मौजूद लोग फायर यंत्र से काबू पाने की कोशिश की गई लेकिन तभी सिलेंडर गर्म होने के कारण फट गया जिससे खाना बना रहे कुक का हाथ झुलस गया।सिलेंडर फटने के कारण हुए धमाके से मौके पर मौजूद दर्जनों छात्र-छात्राओं ने भागकर अपनी जान बचाई। धमाका इतना तेज था कि कैफे की छत और फर्नीचर के अवशेष
हवा में दूर दूर तक बिखर गए। जिसकी सूचना पुलिस को दी गई।
साथ ही फायर ब्रिगेड को आग को सूचना दी गई। मौके पर पहुंचे फायर ब्रिगेड कर्मियों ने बड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से प्रारंभिक तौर पर आग का कारण 'शॉर्ट सर्किट' बताया गया है। जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत पाई गई, जानकारी के अनुसार, कर्मचारियों की एक छोटी सी लापरवाही इस बड़े हादसे का कारण बनी। बताया जा रहा है कि रसोई में काम के दौरान गैस का एक बर्नर या पाइप खुला रह गया था, जिससे गैस का रिसाव होने लगा। देखते ही देखते कैफे के भीतर आग की लपटें उठने लगी। शुरुआत में कर्मचारियों ने आग पर काबू पाने की कोशिश की, लेकिन आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। अभी अफरा-तफरी मची ही थी कि अचानक एक गैस सिलेंडर भीषण धमाके के साथ फट गया। धमाके की गूंज दूर दूर तक सुनाई दी, जिससे लाइब्रेरी और हॉस्टल में पढ़ रहे छात्र सहम गए। हादसे के समय रसोई में खाना बना रहा कुक का हाथ आग की चपेट में आने के कारण हाथ झुलस गया जिसको तुरंत फर्स्ट एड देकर छुट्टी दे दी गई। इसराना थाना प्रभारी महिपाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि घटना रविवार रात की है, जब यूनिवर्सिटी कैंपस में सामान्य हलचल थी। कैफे नंबर 14 में कर्मचारी रात का खाना तैयार कर रहे थे और हॉस्टल के कई छात्र वहां डिनर कर रहे थे। एक वीडियो में एक छात्रा को यह कहते सुना जा सकता है कि इतनी बड़ी आग को इस छोटे से सिलेंडर से कैसे बुझाया जाएगा, हमें यहां क्यों फंसा दिया है। उनकी बातचीत के दौरान ही एक जोरदार धमाका होता है और पूरी स्क्रीन पर आग का गोला छा जाता है, जिसके बाद छात्राओं में चीख-पुकार मच जाती है। धमाके की आवाज सुनते ही कैफे के भीतर मौजूद छात्र जान बचाकर बाहर की तरफ भागे। छात्रों ने बताया कि यदि वे कुछ सेकंड और अंदर रुकते तो बड़ा जानमाल का नुकसान हो सकता था। धमाके के बाद कैंपस के अन्य कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंचे। उन्होंने यूनिवर्सिटी में लगे फायर सेफ्टी यंत्र का उपयोग कर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन ब्लास्ट के कारण आग बेकाबू हो चुकी थी।
इसके बाद तुरंत पुलिस सहायता और दमकल विभाग को सूचना दी गई। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के आने से पूर्व की यूनिवर्सिटी के अग्निशमन संयंत्र ने आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया था। तब तक कैफे का पूरा फर्नीचर और ढांचा जलकर राख हो चुका था। इसराना थाना प्रभारी महिपाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से प्रारंभिक तौर पर आग का कारण 'शॉर्ट सर्किट' बताया गया था। हालांकि, थाना प्रभारी ने स्पष्ट किया कि घटनास्थल से जो वीडियो और साक्ष्य सामने आए हैं। वीडियो देखने के बाद यह स्पष्ट किया कि सिलेंडर ब्लास्ट का मामला प्रतीत हो रहा है। यूनिवर्सिटी के चांसलर सतपाल बंसल ने बताया कि आग खाना बनाते समय लगी, जब कुक खाना तैयार कर रहा था, इस हादसे में कुक का मामूली हाथ जला जिसको फर्स्ट एड देकर छुट्टी दे दी गई । तथा आग लगते ही यूनिवर्सिटी का फायर सिस्टम तुरंत चालू कर दिया गया था। और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आने से पहले ही आग पर काबू पा लिया था।
हिन्दुस्थान समाचार / अनिल वर्मा

