वर्ष 2011 से पहले संचालित स्कूलों को एक्जिस्टिंग स्कूल माना जाए
फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन ने की शिक्षा मंत्री व निकाय मंत्री से बैठक
चंडीगढ़, 14 अगस्त (हि.स.)। फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन, हरियाणा ने सरकार से मांग की है कि वर्ष 2011 से पहले संचालित स्कूलों को एक्जिस्टिंग स्कूल माना जाए। तकनीकी खामियों के चलते निजी स्कूलों को लगाया गया जुर्माना माफ किया जाए। एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा के नेतृत्व में शिष्टमंडल ने अपनी मांगों को लेकर शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा तथा स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल से मुलाकात की है। प्रतिनिधिमंडल में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट सतबीर पटेल, सचिव दिनेश जोशी तथा कैशियर ओमप्रकाश शामिल रहे।
फेडरेशन ने मांग की कि जिन निजी स्कूलों ने सरकार के पोर्टल पर निर्धारित सीटें दिखाई थीं, लेकिन तकनीकी त्रुटि, पोर्टल की समस्या या किसी अन्य अनजाने कारण से सीटें लॉक नहीं हो पाईं, उन पर लगाया गया जुर्माना पूरी तरह समाप्त किया जाए। फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि जानबूझकर सरकारी नियमों की अवहेलना करने वाले स्कूलों पर ही कार्रवाई होनी चाहिए। शिक्षा मंत्री ने इस विषय पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए उचित समाधान का आश्वासन दिया।
प्रतिनिधिमंडल ने 134-ए के तहत वर्ष 2015 से लंबित भुगतान, आरटीई के तहत देय राशि, चिराग योजना के भुगतान तथा कक्षा नौवीं से 12 तक 134-ए के तहत पढ़ाए गए विद्यार्थियों के भुगतान को शीघ्र जारी करने की मांग की। फेडरेशन ने कहा कि 15 वर्षों से भुगतान लंबित रहने से निजी स्कूलों की आर्थिक स्थिति और शिक्षा की गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही हैं।
उच्च न्यायालय में विभाग द्वारा दिए गए शपथ-पत्र के अनुरूप आरटीई की निर्धारित दरों पर भुगतान करने की मांग भी रखी गई। फेडरेशन ने 2011 से पहले संचालित गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों को राहत देते हुए एक्जिस्टिंग स्कूल के रूप में मान्यता देने तथा पुराने अस्थायी स्कूलों को स्थायी मान्यता प्रदान करने की मांग की। पोर्टल बंद होने के कारण विद्यार्थियों को खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने से रोकने का मुद्दा भी उठाया गया। शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया कि पोर्टल की समस्या के कारण किसी विद्यार्थी को खेलों से वंचित नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्लेज मनी को न्यूनतम करने का भी आश्वासन दिया।
स्थानीय निकायों से संबंधित मांगों पर प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल से मांग की कि स्वीकृत कॉलोनियों में स्थित स्कूलों को अनधिकृत न दर्शाया जाए तथा स्कूलों पर लगाए जा रहे कमर्शियल टैक्स/चार्जेज को इंस्टीट्यूशनल श्रेणी में रखा जाए। स्थानीय निकाय मंत्री ने संबंधित अधिकारियों से बात कर इन समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया। फेडरेशन ने फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट की वैधता 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष करने की मांग भी रखी। मंत्री ने मांग का परीक्षण कर उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

