अब तक सैकड़ों जिंदगियां लील चुकी है फरीदाबाद में बनी कृत्रिम झीलें

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अब तक सैकड़ों जिंदगियां लील चुकी है फरीदाबाद में बनी कृत्रिम झीलें


फरीदाबाद, 08 अप्रैल (हि.स.)। अरावली की हसीन वादियों में बनी कृत्रिम झीलें अब तक सैंकड़ों लोगों की जिंदगियां लील चुकी हैं। झीलों में हो रही मौतों का रहस्य आज तक कोई नहीं समझ पाया है। यही कारण है अब इन झीलों को खूनी झीलों के नाम से जाना जाता है। मंगलवार को भी सिरोही में बनी कृत्रिम झील में नहाने गए दिल्ली निवासी एक युवक की डूबने से मौत हो गई। बुधवार को पुलिस ने मृतक के शव का जिले के सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम करवाया और कार्रवाई कर शव परिजनों को सौंप दिया। दिल्ली के बसंत गांव का निवासी अभिषेक उम्र 21 साल मंगलवार शाम अपने चार दोस्तों के साथ बाइकों पर सवार होकर झील पर नहाने आया था। सभी युवक झील में नहा रहे थे, इसी दौरान अभिषेक गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। दोस्तों ने उसे बचाने के लिए शोर मचाया, लेकिन तब तक वह पानी में लापता हो गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से झील में तलाश शुरू करवाई। काफी प्रयास के बाद युवक को पानी से बाहर निकाला गया और उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। डेथ वैली के नाम से मशहूर यह झील सात खदानों का एक संग्रह है। स्थानीय लोग बताते हैं कि 1990 तक अरावली में खनन का कार्य धड़ल्ले से चला। वर्ष 1991 में खनन पर सरकार ने प्रतिबंध लगा दी। जिसके बाद फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड किनारे आधा दर्जन से अधिक खदानें भू जल को छू गई और यहां प्राकृतिक रूप से नीले रंग का साफ पानी निकल आया, जो धीरे-धीरे विशालकाय झील में तब्दील हो गई। यही कारण है कि इन झीलों की गहराई का अंदाजा लगाना काफी मुश्किल है। फरीदाबाद में सूरजकुंड, बड़खल, सिरोही, मोहब्ताबाद व पाली, पांच स्थानों पर यह कृत्रिम झीलें बनी हुई हैं । यहां की सुंदरता देख साल 1991 के बाद से दिल्ली समेत पूरे एनसीआर के लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ घूमने-फिरने आने लगे। जैसे जैसे यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ी, वैसे ही दुर्घटनाओं का आंकड़ा भी बढ़ता चला गया। कभी कोई झील में नहाने के दौरान डूब जाता, तो कोई सेल्फी लेने के चक्कर में इसमें गिरकर अपनी जान गंवा बैठा। एक अनुमान के मुताबिक, यहां हर साल तीन लोगों की डूबकर मौत होती है। साल 1991 में खनन का काम बंद होने के बाद अब तक करीब 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। यहां पर तैरना प्रतिबंधित है और प्रशासन की तरफ से लगातार चेतावनी दी जाती रहती है। पुलिस प्रवक्ता यशपाल का कहना है कि इन झीलों के आसपास खतरे के चिन्ह अंकित किए गए है, साथ ही साथ तार फैसिंग भी की गई है ताकि इन झीलों तक लोग न पहुंचे परंतु सोशल मीडिया पर इन झीलों की सुंदरता युवाओं को आकर्षित करती है और गर्मियों में वह यहां पिकनिक के लिए आते है और हादसे का शिकार बनकर अपनी जान गंवा देते है।

हिन्दुस्थान समाचार / -मनोज तोमर

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