जॉर्डन से नौकरी छोड़ प्रेमानंद महाराज के लिए शुरु की कांवड यात्रा

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जॉर्डन से नौकरी छोड़ प्रेमानंद महाराज के लिए शुरु की कांवड यात्रा


फरीदाबाद, 03 अगस्त (हि.स.)। फरीदाबाद के सरूरपुर गांव के 28 वर्षीय रमन की अनोखी दंडवत कांवड़ यात्रा चर्चा में है। हाल ही में जॉर्डन की नौकरी छोडक़र भारत लौटे रमन हरिद्वार से चार लीटर गंगाजल से भरा कलश लेकर दंडवत करते हुए वृंदावन की ओर बढ़ रहे हैं। रमन ने बताया कि यह यात्रा वह प्रेमानंद महाराज के अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए कर रहा है। उसकी इच्छा है कि वृंदावन पहुंचकर वह गंगाजल से प्रेमानंद महाराज का स्नान कराए। करीब 350 किलोमीटर लंबी यह दंडवत यात्रा 22 जुलाई को हरिद्वार से शुरू हुई थी। कई दिनों की कठिन सफर के बाद रमन अब फरीदाबाद पहुंच चुका है।इस पूरी यात्रा में उसके साथ दो भाई और तीन दोस्त भी हैं। छह लोगों की टीम हर कदम पर उसकी सेवा और सहयोग कर रही है। रमन ने 10वीं तक पढ़ाई की है। फरीदाबाद में एक्सपोर्ट कंपनी में काम किया। फिर करीब पांच साल पहले जॉर्डन चला गया था। वहां एक्सपोर्ट कंपनी में कोऑर्डिनेटर की नौकरी की। 45 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन था। परिवार में माता-पिता, चार भाई और एक बहन हैं, वह सबसे छोटा है। उसके पिता बदरपुर बॉर्डर पर सिक्योरिटी गार्ड हैं। करीब तीन साल पहले उसने ऑनलाइन प्रेमानंद महाराज के प्रवचन सुनने शुरू किए। धीरे-धीरे वह उनसे जुड़ता चला गया। वह रोजाना तीन से चार घंटे तक नियमित रूप से उनके प्रवचन सुनता था। जब उसे प्रेमानंद महाराज के खराब स्वास्थ्य के बारे में जानकारी मिली तो उसने उनके लिए दंडवत कांवड़ यात्रा करने का संकल्प लिया। इसके लिए उसने नौकरी छोड़ दी। 21 अप्रैल को जॉर्डन से भारत लौटा। रमन ने बताया कि भारत लौटने के बाद भी वह नियमित रूप से प्रवचन सुनता रहा। इससे पहले वह 12 बार अलग-अलग प्रकार की कांवड़ ला चुका है, लेकिन दंडवत कांवड़ यात्रा पहली बार कर रहा है। शुरुआत में उसने परिवार को इसकी जानकारी नहीं दी थी। बाद में पता चलने पर परिवार ने उसका साथ दिया। रमन ने बताया कि शुरुआत में वह रोज करीब पांच किलोमीटर चलता था, लेकिन अब प्रतिदिन करीब आठ किलोमीटर की दूरी तय कर रहा है। उसके साथ भाई सोनू और कुंदन भी यात्रा कर रहे हैं। तीन अन्य साथी उसके दोस्त हैं। सभी लोग रास्ते में खाना बनाने का सामान अपने साथ लेकर चल रहे हैं। रमन ने बताया कि वह अब तक कभी प्रेमानंद महाराज से नहीं मिला, क्योंकि जब से वह उनके प्रवचन सुनने लगा, तब से विदेश में ही था। उसे विश्वास है कि वृंदावन पहुंचने पर उसकी मुलाकात महाराज से जरूर होगी। वह उन्हें गंगाजल से स्नान कराना चाहता है। यही उसके जीवन की सबसे बड़ी इच्छा है। रमन ने बताया कि उत्तर प्रदेश में यात्रा के दौरान पुलिस की ओर से अच्छे इंतजाम मिले। हालांकि कालिंदी कुंज के रास्ते हरियाणा में प्रवेश करने के बाद फरीदाबाद में भारी ट्रैफिक के कारण आगे बढऩे में परेशानी हुई।

हिन्दुस्थान समाचार / -मनोज तोमर

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