फरीदाबाद पुलिस पर अवैध हिरासत के आरोप पर मानव अधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट

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मानवाधिकार आयोग ने मांगी आईजी स्तर की जांच

फरीदाबाद, 21 जुलाई (हि.स.)। फरीदाबाद के थाना सदर बल्लभगढ़ पुलिस पर एक अधिवक्ता द्वारा लगाए गए अवैध हिरासत, पुलिस कस्टडी में मारपीट और मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोपों को हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने गंभीरता से लिया है। आयोग ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने के आदेश देते हुए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिया है कि जांच आईजीपी स्तर के अधिकारी से कराई जाए तथा विस्तृत रिपोर्ट आयोग के समक्ष पेश की जाए। आयोग अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने कहा कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 22 के तहत नागरिकों को मिले मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का मामला बनता है। बिना कानूनी प्रक्रिया के किसी व्यक्ति को हिरासत में रखना, उसके साथ मारपीट करना और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करना कानून के शासन के विपरीत है। शिकायतकर्ता अधिवक्ता मोहित दलाल के अनुसार, दो जुलाई 2026 की रात चंदावली चौक पर पुलिस ने दस्तावेजों की जांच के लिए उन्हें रोका। उनका आरोप है कि बार काउंसिल का पहचान पत्र दिखाने के बावजूद पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। शिकायत में कहा गया है कि बाद में पुलिस ने उनका पीछा कर उन्हें और उनके साथियों को जबरन थाना सदर बल्लभगढ़ ले जाकर पूरी रात हिरासत में रखा। इस दौरान कथित तौर पर मारपीट की गई और करीब 12 घंटे बाद लिखित माफीनामा लेने के बाद उन्हें छोड़ा गया। आयोग ने आदेश में कहा कि पुलिस अभिरक्षा में हिंसा, अवैध हिरासत और अमानवीय व्यवहार मानवाधिकारों के सबसे गंभीर उल्लंघनों में शामिल हैं। प्रत्येक नागरिक को, चाहे उसका पेशा या सामाजिक दर्जा कुछ भी हो, सम्मानजनक और निष्पक्ष व्यवहार पाने का अधिकार है। आयोग ने कहा कि शिकायत में उठाए गए सवाल सुप्रीम कोर्ट के डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य और परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह मामलों में जारी दिशानिर्देशों के पालन से जुड़े हैं। ऐसे मामलों में गिरफ्तारी रिकॉर्ड, हिरासत रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज का संरक्षण निष्पक्ष जांच के लिए आवश्यक है। हरियाणा मानवाधिकार आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 10 सितंबर 2026 की अगली सुनवाई से कम-से-कम एक सप्ताह पहले अपनी विस्तृत रिपोर्ट आयोग में जमा करें। मामले की गंभीरता, संभावित मानवाधिकार उल्लंघन और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता को देखते हुए आयोग ने इस प्रकरण को अगली सुनवाई में फुल कमीशन के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया है।

हिन्दुस्थान समाचार / -मनोज तोमर

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