फरीदाबाद : ‘डेथ कॉरिडोर बनी आगरा-गुरुग्राम नहर, चार साल में 50 से ज्यादा मौतें
फरीदाबाद, 20 जुलाई (हि.स.)। फरीदाबाद से होकर गुजरने वाली आगरा और गुरुग्राम नहरों को कभी सिंचाई के मुख्य साधनों में गिना जाता था, लेकिन अब ये ‘डेथ कॉरिडोर’ बनती जा रही है। बीते चार वर्षों में इन दोनों नहरों में 50 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। कभी आत्महत्या, कभी हादसा और कभी संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिलने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। लगभग हर सप्ताह नहर में कूदने या डूबने का कोई नया मामला सामने आ रहा है, जिससे पुलिस और प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है। पुलिस के मुताबिक वर्ष 2022 से अब तक आगरा और गुरुग्राम नहर में डूबने से 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। फरीदाबाद में आगरा और गुरुग्राम नहर करीब 26 किलोमीटर तक बहती हैं। दोनों नहरें दिल्ली के कालिंदी कुंज से निकलकर सेहतपुर, सरस्वती कॉलोनी, श्याम कॉलोनी, गणपति कॉलोनी, अजय नगर, धीरज नगर, एतमादपुर, मवई, खेड़ी पुल और भारत कॉलोनी जैसे घनी आबादी वाले इलाकों से गुजरती हैं। लोगों की आवाजाही के लिए करीब 16 पुल बनाए गए हैं, लेकिन अधिकांश पुलों पर न तो ऊंची रेलिंग है और न ही सुरक्षा जाल। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई पुलों की रेलिंग क्षतिग्रस्त है और रात के समय पर्याप्त रोशनी भी नहीं रहती। ऐसे में तनाव या मानसिक परेशानी से गुजर रहे लोग आसानी से नहर में छलांग लगा देते हैं। दिल्ली सीमा में आगरा नहर के किनारे सुरक्षा के बेहतर इंतजाम किए गए हैं। कालिंदी कुंज, मदनपुर खादर, लोहिया पुल और मीठापुर जैसे इलाकों में पुलों पर करीब 10 फीट ऊंचे लोहे के सुरक्षा जाल लगाए गए हैं। नहर किनारे बनी सडक़ों पर भी बैरियर लगाए गए हैं, ताकि कोई व्यक्ति जानबूझकर या गलती से नहर में न जा सके। इसके उलट फरीदाबाद में अब तक इस तरह की कोई व्यापक सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई है। पलवल के छज्जू नगर क्षेत्र में जरूर सुरक्षा जाल लगाया गया है, लेकिन फरीदाबाद के अधिकांश पुल आज भी असुरक्षित हैं। नहर में किसी के गिरने या कूदने के बाद बचाव कार्य भी आसान नहीं होता। डीसीपी सेंट्रल उषा ने बताया कि नहर में होने वाली मौतों को रोकने के लिए पुलिस लगातार गश्त कर रही है। संबंधित विभागों को सुरक्षा जाल, बैरिकेडिंग और अन्य सुरक्षा उपाय करने के लिए पत्र भी भेजे गए हैं। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दिल्ली की तर्ज पर सभी पुलों पर सुरक्षा जाल, ऊंची रेलिंग, सीसीटीवी कैमरे और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था कर दी जाए तो आत्महत्या और हादसों की बड़ी संख्या को रोका जा सकता है।
हिन्दुस्थान समाचार / -मनोज तोमर

