फरीदाबाद : चार एंबुलेंस पर 50 लाख का डीजल खर्च, जांच कमेटी हुई गठित
फरीदाबाद, 02 नवंबर (हि.स.)। फरीदाबाद के बीके सिविल अस्पताल में महीनों से खड़ी चार एंबुलेंस के नाम पर करीब 50 लाख रुपए का डीजल खरीदे जाने का मामला सामने आया है। मामला उजागर होने के बाद सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने जांच कमेटी गठित की। कमेटी को 15 दिन के अंदर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए गए हैं। सीएमओ ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एनएचएम डायरेक्टर वीरेंद्र यादव भी मामले पर नजर बनाए हुए हैं। सोमवार को बीके अस्पताल के दौरे के दौरान उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, हाल में ही पंचकूला स्थित मुख्यालय ने एम्बुलेंस में फ्यूल कार्ड के जरिए होने वाले लेनदेन की जांच की थी। इस दौरान सामने आया कि कुछ एम्बुलेंस बिना चले ही उनके नाम पर पेट्रोल पंप से डीजल खरीदा जा रहा था। यह सिलसिला एक-दो बार नहीं, बल्कि लगातार जारी था। जांच में करीब 50 लाख रुपए का ईंधन खरीदे जाने का अंदेशा जताया गया है। खास बात यह है कि जिस अवधि में इन एंबुलेंस के नाम पर डीजल खरीदा गया, उस दौरान वे अपनी निर्धारित जगह से कहीं नहीं गई थीं। विभाग के मुताबिक, एचआर 38जीवी 3491 और एचआर-38 जीवी 9863 नंबर की दो एम्बुलेंस तीन से चार महीने से अस्पताल की मोर्चरी के पास खड़ी थीं। इसके बावजूद 11 अक्टूबर तक इनके फ्यूल कार्ड से डीजल भरवाने की एंट्रियां दर्ज मिलीं। वहीं एचआर38जेड0951 और एचआर38जीवी1670 नंबर की अन्य दो एंबुलेंस जनवरी और अगस्त से एजेंसी की वर्कशॉप में खड़ी थीं। इनके फ्यूल कार्ड से भी 16 सितंबर और 11 अक्टूबर तक डीजल भरवाने का रिकॉर्ड मिला। डिप्टी सिविल सर्जन (एनएचएम) विनय गुप्ता ने 16 अक्टूबर को आरटीएस फ्लीट मैनेजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस में डीजल भरवाने का पूरा ब्योरा, लेनदेन की जानकारी और जिम्मेदार कर्मचारियों के नाम मांगे गए। प्रत्येक एम्बुलेंस के हिसाब से डीजल भरवाने की तारीख, मात्रा, कीमत, पेट्रोल पंप और संबंधित कर्मचारियों की जानकारी देने के निर्देश दिए गए। बीके अस्पताल के सीएमओ डॉ. जयंत आहूजा ने 20 अक्टूबर को मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की। कमेटी को 15 दिन के अंदर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। सीएमओ के मुताबिक, रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कदम उठाए जाएंगे। इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब एम्बुलेंस महीनों से एक ही जगह खड़ी थीं, तो उनके नाम पर डीजल किसकी अनुमति से खरीदा गया। फ्यूल कार्ड से हुए लेनदेन का सत्यापन किसने किया। बंद एम्बुलेंसों के नाम पर लगातार डीजल की एंट्रियां कैसे दर्ज होती रहीं। क्या अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी या फिर जानबूझकर अनदेखी की गई। अब इन सभी सवालों के जवाब जांच कमेटी की रिपोर्ट से सामने आने की उम्मीद है।
हिन्दुस्थान समाचार / -मनोज तोमर

