सिरसा: मांगों को लेकर जिलेभर के किसानों ने लघु सचिवालय में बोला हल्ला

WhatsApp Channel Join Now
सिरसा: मांगों को लेकर जिलेभर के किसानों ने लघु सचिवालय में बोला हल्ला


सिरसा, 2 दिसंबर (हि.स.)। मांगों को लेकर सिरसा जिले के किसानों ने भारतीय किसान एकता (बीकेई) के बैनर तले मंगलवार को लघु सचिवालय में धरना-प्रदर्शन किया। इससे पूर्व किसान बरनाला रोड स्थित शहीद भगत सिंह स्टेडियम में एकत्रित हुए और यहां से जुलूस की शक्ल में प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे और उपायुक्त सिरसा को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

बीकेई के प्रदेशाध्यक्ष लखविंद्र सिंह औलख ने कहा कि खरीफ -2023 में सिरसा जिले के कई किसानों का बीमा प्रीमियम 10 से 12 महीनों बाद वापिस आ गया था, जिसके लिए पहले भी किसानों ने अपील की थी कि वह बीमा प्रीमियम किसानों से दोबारा लेकर उन्हें बीमा क्लेम जारी किया जाये। खरीफ -2024 में सिरसा जिले के 25 गांवों पर कंपनी द्वारा आपति लगाकर उनका बीमा क्लेम रोक दिया गया था। जिसे मीटिंग में रखा जाना था, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक मीटिंग नहीं हुई है। खेत को इकाई मानकर ही उसके नुक्सान का आंकलन किया जाये। खरीफ -2025 में भारी बरसात, जलभराव व बाढ़ से सिरसा जिले में बहुत भारी नुक्सान हुआ था। जिन किसानों की केसीसी है। उन किसानों का खरीफ व रबी सीजन का बीमा प्रीमियम बैंकों द्वारा 31 जुलाई व 31 दिसम्बर को बिना उनकी मर्जी से उनके खातों से काट लिया जाता है।

उन्होंने बताया कि खरीफ -2020 में सिरसा जिले में सफेद मच्छर से नरमें की फसल बर्बाद हो गई थी। जिसका लम्बे संघर्ष के बाद हरियाणा सरकार ने डबवाली, कालांवाली, गोरीवाला व सिरसा 4 तहसीलों का 65 करोड़ के लगभग मुआवजा जारी किया था। पहले 2023 में यह फण्ड तहसीलों में भेजा गया जो राजस्व विभाग ने किसानों के खातों में जारी न करने की वजह से 31 मार्च 2024 को वापिस हो गया। उसके बाद दूसरी बार यह राशि तहसीलों को जारी की गई दूसरी बार भी तहसील अधिकारियों/कर्मचारियों की लाहपरवाही की वजह से पूरी राशि किसानों को जारी नहीं की गई। खरीफ -2025 में भारी बरसात जलभराव व बाढ से सिरसा जिले किसानों की हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो गई।

किसान नेता लखविंद्र सिंह ने कहा कि परमल धान की खरीद में हरियाणा में बड़ा घोटाला हुआ है, जिसमें सिरसा जिला भी शामिल है। कालांवाली की फग्गू अनाज मंडी में नमी के नाम पर किसानों से 10 से 20 किलो. प्रति क्विंटल काट ली गई है। प्राईवेट शैलर मालिकों ने अपने कंडों व मशीन से धान की नमी की जांच करके किसानों का धान लूटा है। क्योंकि जब जांच में गड़बड़ी पाये जाने पर सम्बन्धित अधिकारियों की शिकायत की तो पाया गया कि सरकारी मशीन से धान की नमी 21.3 आई व शैलर वाली मशीन पर नमी 28.7 दर्शाई गई। इस घोटाले की उच्च स्तरीय जांच करवाकर किसानों के साथ हुई लूट की भरपाई करवाई जाए।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / Dinesh Chand Sharma

Share this story