हिसार: समय पर सरसों की बिजाई और उन्नत तकनीक अपनाकर किसान बढ़ा सकते पैदावार : प्रो. बीआर कम्बोज
हकृवि के डॉ. रामधन सिंह बीज फार्म में कुलपति ने किसानों की मौजूदगी में सरसों की बिजाई का किया शुभारंभहिसार, 03 अक्टूबर (हि.स.)। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के डॉ. रामधन सिंह बीज फार्म में कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने किसानों की मौजूदगी में सरसों की बिजाई का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों से सरसों की बिजाई वैज्ञानिक तरीके से करने और उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।कुलपति ने शनिवार काे कहा कि सरसों हरियाणा की प्रमुख तिलहनी फसलों में शामिल है। अच्छी पैदावार के लिए समय पर बिजाई और खेत की उचित तैयारी जरूरी है। उन्होंने किसानों को विश्वविद्यालय द्वारा सुझाई गई उन्नत किस्मों और कृषि तकनीकों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि मौसम की परिस्थितियों के अनुसार हरियाणा में सरसों की बिजाई 20 अक्टूबर तक की जा सकती है। समय पर बिजाई करने से फसल को अनुकूल मौसम मिलता है और पौधों की अच्छी वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि किसानों को अपने क्षेत्र, सरसों की किस्म और सिंचाई सुविधा को ध्यान में रखते हुए बिजाई का समय तय करना चाहिए। बिजाई के समय खेत में पर्याप्त नमी होना भी जरूरी है। बहुत सूखी या अधिक गीली मिट्टी में बीज का अंकुरण प्रभावित हो सकता है। अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने कहा कि सरसों की अच्छी पैदावार के लिए समय पर सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण तथा कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी जरूरी है। उन्होंने किसानों से सरसों की बिजाई और फसल प्रबंधन के लिए हकृवि के कृषि वैज्ञानिकों एवं विस्तार विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार कार्य करने का आह्वान किया। इससे किसान बेहतर पैदावार के साथ अपनी आय में भी वृद्धि कर सकते हैं।फार्म के निदेशक-कम-नियंत्रण अधिकारी डॉ. संजय ठकराल ने बताया कि डॉ. रामधन सिंह बीज फार्म 2752 एकड़ में फैला हुआ है। यहां किसानों को उन्नत किस्मों के बीज उपलब्ध करवाने के लिए रबी और खरीफ फसलों की बिजाई की जाती है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा सरसों की अनेक उन्नत किस्में विकसित की गई हैं, जिनकी बिजाई कर किसान अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। इनमें आरएच 1975, आरएच 725, आरएच 1424, आरएच 1706 और आरएचएच 2101 सहित अन्य किस्में शामिल हैं। इस अवसर पर लैंडस्केप यूनिट के प्रभारी डॉ. अरविंद मलिक, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एके ढाका, कर्मचारी और किसान उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

