हांसी में स्वतंत्रता दिवस पर सीएम के कार्यक्रम का विरोध करने वाले 10 किसान नेता जेल भेजे

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हांसी में स्वतंत्रता दिवस पर सीएम के कार्यक्रम का विरोध करने वाले 10 किसान नेता जेल भेजे


हांसी में स्वतंत्रता दिवस समारोह के विरोध और

हंगामे का मामला

लगभग 200 लोगों पर एफआईआर, बचाव पक्ष ने गंभीर

धाराओं पर उठाए सवाल

हांसी, 16 अगस्त (हि.स.)। मुख्यमंत्री नायब सिंह

सैनी के हांसी दौरे के दौरान स्वतंत्रता दिवस समारोह के विरोध और हंगामे के मामले में

पुलिस द्वारा नामजद किए गए 10 किसान एवं खाप नेताओं को रविवार को अदालत में पेश किया

गया। अदालत ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए। इसके बाद पुलिस

उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच भोंडसी जेल ले गई। आरोपियों की पेशी को लेकर न्यायिक परिसर

में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे और सीआईए की टीम भी मौके पर तैनात रही।

पुलिस के अनुसार मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के

विरोध के दौरान हुए हंगामे को लेकर करीब 200 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

इनमें 10 किसान एवं खाप नेताओं को नामजद किया गया है। पुलिस ने आरोपियों पर हत्या के

प्रयास समेत विभिन्न गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। अदालत में पुलिस ने दलील दी

कि आरोपियों को हिसार जेल भेजने पर अन्य प्रदर्शनकारी उन्हें वहां पहुंचने से रोकने

का प्रयास कर सकते हैं। इस आधार पर पुलिस ने आरोपियों को भोंडसी जेल भेजने की मांग

की, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।

बचाव पक्ष ने गंभीर धाराओं पर उठाए सवाल

दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने एफआईआर में लगाई गई गंभीर

धाराओं और पुलिस की कार्रवाई को चुनौती दी। अधिवक्ता विक्रम मित्तल ने अदालत में कहा

कि हत्या के प्रयास की धारा लगाने का आधार नहीं बनता, क्योंकि घटना में किसी व्यक्ति

को चोट लगने की बात सामने नहीं आई है। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों की किसी

की हत्या करने की कोई मंशा नहीं थी। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपियों की ओर से

देश की संप्रभुता, एकता एवं अखंडता को खतरा पहुंचाने वाला कोई भाषण या बयान देने के

ठोस वीडियो अथवा अन्य प्रमाण पुलिस के पास नहीं हैं। अधिवक्ताओं के मुताबिक किसान मुख्यमंत्री

से मिलकर अपनी मांगें रखने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहे थे।

पुलिस पर भी लगाए गंभीर आरोप

बचाव पक्ष ने पुलिस प्रशासन पर भी गंभीर आरोप

लगाए। अधिवक्ताओं ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों की ओर से नहीं, बल्कि पुलिस की ओर

से पत्थरबाजी शुरू की गई। उन्होंने हांसी के पुलिस अधीक्षक पर स्वयं आगे आकर पत्थरबाजी

करने का आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर वायरल कथित वीडियो का हवाला दिया। इसके अलावा

एक सीआईए प्रभारी द्वारा एके-47 तानकर प्रदर्शनकारियों को धमकाने का आरोप भी लगाया

गया। हालांकि, ये सभी आरोप बचाव पक्ष की ओर से अदालत में रखे गए दावे हैं और इनकी स्वतंत्र

पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होना बाकी है।

अधिवक्ता धर्मवीर जांगड़ा ने अदालत में कहा कि

किसानों का मुख्यमंत्री से मिलने का कार्यक्रम पहले से तय था और वे शांतिपूर्ण ढंग

से अपनी मांगें रखने जा रहे थे। उन्होंने शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन को संविधान प्रदत्त

अधिकार बताते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। न्यायिक हिरासत में भेजे गए आरोपियों में सुरेश

कोथ, शमशेर नंबरदार, सुरेंद्र मान, सुमित दलाल, सुभाष ढिल्लो, रणबीर मलिक, वजीर निवासी

लाडवा, जगमेंद्र निवासी बहु अकबरपुर, सुलेंद्र निवासी किनाला तथा सतपाल सिंह निवासी

लाडवा शामिल हैं। आरोपियों की ओर से अधिवक्ता विक्रम मित्तल, भगत

सिंह रंगा, सोमदत्त सिवाच और धर्मवीर जांगड़ा ने पैरवी की। बचाव पक्ष ने आरोपियों को

राहत देने की मांग करते हुए पुलिस की कार्रवाई और गंभीर धाराओं को चुनौती दी। अब मामले

में आगे की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान पुलिस के आरोपों और बचाव पक्ष की दलीलों पर

सुनवाई होगी।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

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