जींद में पराली जलाने की घटनाओं का पता लगाएगा ड्रोन

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जींद में पराली जलाने की घटनाओं का पता लगाएगा ड्रोन


जींद, 09 अक्टूबर (हि.स.)। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा धान की पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने तथा फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिले में व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत कृषि विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर किसानों से संपर्क कर रही हैं और उन्हें पराली प्रबंधन के विभिन्न वैज्ञानिक तरीकों एवं उपलब्ध विकल्पों की जानकारी देकर जागरूक कर रही हैं। पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी निगरानी रखने के लिए जिले में दो ड्रोन तैनात किए गए हैं। ड्रोन के माध्यम से खेतों में आगजनी की घटनाओं पर नजर रखी जाएगी तथा ऐसी घटनाओं की सूचना फोटो सहित संबंधित अधिकारियों को भेजी जाएगी। प्राप्त सूचना के आधार पर पराली प्रोटेक्शन फोर्स द्वारा मौके पर पहुंचकर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

रेड जोन में शामिल गांवों पर रहेगी विशेष नजर

उप निदेशक कृषि डा. सुखदेव कम्बोज ने बताया कि विभाग द्वारा पिछले तीन वर्षों के दौरान रेड जोन में शामिल रहे गांवों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन गांवों में वायु गुणवत्ता के स्तर की जांच एवं निगरानी के लिए विशेष मशीनें लगाई गई हैं ताकि वायु गुणवत्ता से संबंधित आंकड़े प्राप्त किए जा सकें। साथ ही रेड जोन के गांवों से प्राप्त शिकायतों पर गंभीरता से विचार करते हुए उनका उचित निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके। इस व्यवस्था से पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में सहायता मिलेगी।

खंड, उपमंडल, ग्रामीण स्तर पर 317 टीमें करेंगी निगरानी

अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए खंड स्तर पर सात टीमें, उपमंडल स्तर पर पांच टीमें तथा ग्रामीण स्तर पर 305 टीमें सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। ये टीमें खेतों का निरीक्षण करनेए किसानों को जागरूक करने तथा पराली जलाने से संबंधित घटनाओं की सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। इसके अतिरिक्त गांव स्तर पर नियुक्त नोडल अधिकारियों के माध्यम से फसल अवशेष प्रबंधन गतिविधियों की नियमित निगरानी की जा रही है। किसानों को जागरूक करने के लिए गांवों में मुनादी, किसान बैठकों, जागरूकता कार्यक्रमों तथा प्रचार सामग्री के माध्यम से पराली प्रबंधन का संदेश दिया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा किसानों को समझाया जा रहा है कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी की उर्वरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजेंद्र मराठा

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