शिक्षा विभाग में सीपीएल के लिए उपायुक्त की अनुशंसा जरूरी नहीं
चंडीगढ़, 22 जून (हि.स.)। हरियाणा सरकार ने शिक्षा विभाग में कैजुअल पेड लीव के संबंध में जारी पुराने
आदेशों को वापस ले लिया है। अब जिला उपायुक्त की अनुशंसा जरूरी नहीं होगी।
महानिदेशक
सेकेंडरी शिक्षा कार्यालय की ओर से सोमवार को एक आदेश जारी करके टीचिंग और नॉन टीचिंग कर्मचारियों के कैजुअल पेड लीव (सीपीएल) से जुड़े एक विवादित आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। इससे
पहले 9 मार्च 2026 को विभाग की तरफ से आदेश जारी किए गए थे।
9 मार्च 2026 को जारी
आदेश में कहा गया था कि शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के सीपीएल से जुड़े मामलों को जिला स्तर पर उपायुक्त की अनुशंसा के बाद ही मुख्यालय
भेजा जाएगा। इस व्यवस्था को लेकर शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और संगठनों में
असंतोष था। उनका तर्क था कि इससे अवकाश संबंधी मामलों में अनावश्यक देरी और
अतिरिक्त प्रशासनिक प्रक्रिया बढ़ रही है।
अब नए आदेश जारी करते हुए महानिदेशक सेकेंडरी शिक्षा जितेंद्र कुमार द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट
किया गया है कि, 09 मार्च 2026 के आदेश
के तहत शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों के सीपीएल से
संबंधित मामलों को जिला उपायुक्त की अनुशंसा के बाद मुख्यालय भेजने संबंधी आदेश
तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाते हैं। यानी अब सीपीएल मामलों
में उपायुक्त की अनुशंसा वाली बाध्यता समाप्त हो गई है। नए
आदेश की प्रतियां राज्य के सभी उपायुक्तों, जिला शिक्षा
अधिकारियों, एससीईआरटी निदेशक, स्कूल
शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और निदेशालय की विभिन्न शाखाओं को भेजी गई हैं,
ताकि तत्काल प्रभाव से इसका पालन सुनिश्चित किया जा सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

