माता सावित्री बाई फुले ने महिलाओं को दिखाई एक नई राह: रमेश मालिक।
पानीपत, 03 जनवरी (हि.स.)। भारत की पहली महिला शिक्षिका, महान समाजसेविका और नारी मुक्ति आंदोलन की प्रणेता माता सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी पानीपत ( ग्रामीण )की तरफ से ट्रांसपोर्ट नगर सेक्टर 25 में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सावित्रीबाई फुले के जीवन,उनके संघर्ष, शिक्षा के प्रति समर्पण और महिलाओं व वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए किए गए योगदान को याद किया गया। साथ ही उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प भी लिया गया। इस अवसर पर जिला कांग्रेस के ग्रामीण अध्यक्ष रमेश मालिक ने कहा कि सावित्री बाई फूले का जन्म: 3 जनवरी, 1831 को महाराष्ट्र के सातारा जिले के नायगाँव में हुआ था। वह अनपढ़ थीं, लेकिन उनके पति ज्योतिबा फुले ने उन्हें घर पर ही शिक्षित किया और उन्हें अध्यापन के लिए प्रशिक्षित किया। सावित्रीबाई और ज्योतिबा फुले ने मिलकर 1848 में पुणे के भिड़ेवाड़ा में लड़कियों के लिए भारत का पहला स्कूल खोला।
उन्होंने अपने जीवनकाल में लड़कियों के लिए कुल 18 स्कूल खोले। उन्होंने दलितों और अछूतों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। उन्होंने अपने घर का पानी का टैंक अछूतों के लिए खोल दिया, जो उस समय एक बहुत बड़ा साहसी कदम था। इस अवसर पर डॉ. ओमवीर पंवार, बलवान वाल्मीकि, सुभाष तंवर, सतपाल रोड़, विकास रोसे, सोनू ढुल ,परवेश मलिक, देव मलिक समेत कई गणमान्य साथी मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल वर्मा

