बैंक घोटाले में ईडी ने विकास एवं पंचायत निदेशालय के तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट को किया गिरफ्तार

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चंडीगढ़, 11 जून (हि.स.)। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े 645 करोड़ रुपये के बहुचर्चित फंड गबन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हरियाणा के विकास एवं पंचायत निदेशालय में तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट रहे नरेश कुमार को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया है।

एजेंसी का आरोप है कि नरेश कुमार न केवल गबन की गई राशि के लाभार्थियों में शामिल था, बल्कि धन के लेन-देन और उसे छिपाने की प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा था। ईडी ने नरेश कुमार को 10 जून की रात गिरफ्तार किया है। उसे विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने 14 जून तक चार दिन की ईडी रिमांड मंजूर कर दी। इससे पहले इसी मामले में रिभव ऋषि, अभय कुमार और विक्रम वाधवा को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

ईडी के अनुसार, जांच में सामने आया है कि हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और चंडीगढ़ तथा पंचकूला के दो निजी स्कूलों के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खातों से करीब 645 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई। जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क में विक्रम वाधवा, रिभव ऋषि, अभय कुमार, बैंक अधिकारियों और कुछ सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई है।

जांच में कई कथित शेल कंपनियों की भूमिका भी सामने आई है। इनमें स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज, आरएस ट्रेडर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड जैसी संस्थाओं के नाम शामिल हैं। ईडी का आरोप है कि सरकारी खातों से निकाली गई राशि पहले इन कंपनियों के खातों में पहुंचाई गई और फिर विभिन्न बैंक खातों के जरिए उसे कई स्तरों पर ट्रांसफर कर धन के स्रोत को छिपाने का प्रयास किया गया।

ईडी के मुताबिक नरेश कुमार को स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स नामक इकाई से सीधे रकम प्राप्त हुई। जांच में यह भी सामने आया है कि उसके और उसके परिवार के बैंक खातों में करीब 1.20 करोड़ रुपये पहुंचे। एजेंसी का दावा है कि बैंकिंग लेन-देन के अलावा गबन की गई राशि से पैदा की गई नकदी भी उसे पहुंचाई गई। ईडी का आरोप है कि नरेश कुमार ने अवैध धन के निर्माण, लेयरिंग और उसे छिपाने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई। जांच एजेंसी उसे इस पूरे नेटवर्क का महत्वपूर्ण कड़ी मान रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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